महलों के नीचे क्यों बनती थीं कई किलोमीटर लंबी सुरंगें? सिर्फ जान बचाना नहीं, ये थी इन खुफिया रास्तों की वजह
पुराने समय में किलों और महलों में गुप्त सुरंगें बनाई जाती थीं। इन सुरंगों को सिर्फ आपाकालीन निकासी के लिए नहीं और भी कई वजहों से बनाया जाता था। ...और पढ़ें

क्यों महलों में बनाए जाती थीं गुप्त सुरंगे? (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के अपने भव्य किलों और खूबसूरत महलों के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। ये किले सिर्फ ऐतिहासिक इमारतें नहीं हैं, बल्कि उनकी वास्तुकला उस समय के राजाओं के वैभव और शान को दर्शाते हैं। ये किले बाहर से जितने खूबसूरत हुआ करते थे, अंदर से उतने ही मजबूत हुआ करते थे। यहीं कारण है कि इनकी इंजीनियरिंग हर किसी को हैरान कर देती है।
इन किलों की एक खासियत इनमें छिपी गुप्त सुरंगे और तहखाने हुआ करती थीं। आपने फिल्मों में देखा होगा और कहानियों में भी सुना होगा कि पुराने समय में राजा अपने महलों और किलों में गुप्त सुरंग बनवाया करते थे, लेकिन इनकी जरूरत क्या थी? आमतौर पर लोग सोचते हैं कि युद्ध में सुरक्षित बाहर निकलने के लिए ये रास्ते बनाए जाते थे, लेकिन इसके पीछे और भी कई कारण थे। आइए जानें क्यों पहले महलों में गुप्त रास्ते बनाए जाते थे।
आपातकालीन रास्ता
इन गुप्त रास्तों को युद्ध जैसे आपातकालीन समय में सुरक्षित बाहर निकलने के लिए बनाया जाता था। जब कोई दुश्मन किले को चारों ओर से घेर लेता था और अंदर खाना-पानी खत्म होने लगता था, तब राजा और उनके परिवार और मंत्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए इन गुप्त रास्तों का इस्तेमाल किया जाता था। ये सुरंगे किले के अंदर शुरू होकर कई किलोमीटर दूर किसी जंगल या नदी के किनारे खुलती थीं, ताकि दुश्मन को इसकी भनक न लगे।
सुरक्षित खजाना और गुप्त बैठकें
पुराने समय में राज्य की सुरक्षा के लिए राजकीय खजाने को सुरक्षित रखना बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती थी। महलों के नीचे ऐसे गुप्त रास्ते बनाए जाते थे, जो ऐसे तहखानों में खुलते थे, जहां राज्य का सोना, चांदी और कीमती जवाहरात छिपाकर रखे जाते थे।
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कई बार किसी बहुत सेंसिटिव मामले पर बात करने के लिए राजा अपने खास मंत्रियों के साथ इन गुप्त कमरों में बैठकें करते थे, ताकि बात की भनक और किसी को न पड़े। ये जगहें इनकी गुप्त हुआ करती थीं कि महल में रहने वाले सभी व्यक्तियों को भी इनके बारे में जानकारी नहीं होती थी।
गुप्तचरों की आवाजाही
पुराने समय में दुश्मन राज्य पर निगाह रखने के लिए गुप्तचर भेजे जाते थे, जो वहां की सूचनाएं अपने राजा तक पहुंचाते थे। राजा का गुप्तचर किसी की निगाह में न आए और सुरक्षित रूप से आ-जा सके, इसलिए गुप्त रास्ते बनाए जाते थे। इन रास्तों की जानकारों बहुत कम लोगों के पास होती थी, ताकि कोई दुश्मन इन रास्तों के महल के अंदर न आ सके।
गुरिल्ला युद्ध रणनीति
कई महान रणनीतिकार और योद्धा किलों में बने इन गुप्त रास्तों और सुरंगों का इस्तेमाल युद्ध में दुश्मन को चकमा देने के लिए भी करते थे। वे छिपकर सेना की एक टुकड़ी के साथ इन रास्तों से बाहर निकलकर दुश्मन पर दूसरी दिशा से हमला कर देते। इससे दुश्मन को पीछे हटना पड़ता और राज्य सुरक्षित हो जाता था।