बच्चों में चिड़चिड़ापन और सुस्ती दूर करनी है तो सेट करें 'स्लीप रूटीन', ये 5 तरीके करेंगे आपकी मदद
बच्चों की अच्छी सेहत के लिए सही स्लीप रूटीन बेहद जरूरी है।

कैसे बनाएं बच्चों के लिए स्लीप रूटीन? (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बच्चों के शारीरिक विकास, मानसिक स्वास्थ्य और सीखने की क्षमता को बढ़ाने के लिए पूरी नींद लेना जरूरी है। अच्छी नींद से उनका मूड बेहतर होता है, फोकस बढ़ता है और इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, जिससे वे कम बीमार पड़ते हैं।
वहीं अगर नींद पूरी न हो, तो बार-बार बीमार पड़ना, चिड़चिड़ापन, सुस्ती और थकान जैसी समस्याएं बच्चों में देखने को मिलती हैं। इसलिए जरूरी है कि आप अपने बच्चों के लिए स्लीप रूटीन सेट करें, ताकि उनमें हेल्दी स्लीपिंग हैबिट्स विकसित हो सकें। आइए जानें इसके लिए टिप्स।
एक निश्चित बेडटाइम रूटीन तैयार करें
बच्चों के लिए रात का एक रूटीन सेट करें, जिसे वे रोज फॉलो करें। सोने से पहले ऐसी एक्टिविटीज कराएं, जिससे दिमाग को संकेत मिले कि अब आराम करने का समय हो गया है। सोने से 30-45 मिनट पहले नहलाना, पजामा पहनना, ब्रश कराना और फिर कोई कहानी या लोरी सुनाना बच्चों को सोने के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है।

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सोने का सही माहौल बनाएं
बेडरूम का वातावरण नींद की क्वालिटी तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है। अगर कमरा बहुत शोर वाला या रोशनी वाला होगा, तो बच्चा गहरी नींद नहीं ले पाएगा। देखें कि कमरा अंधेरा, शांत और आरामदायक तापमान पर हो। अगर बच्चा अंधेरे से डरता है, तो एक बहुत हल्की नाइट लाइट का इस्तेमाल करें। उनके बिस्तर को खिलौनों से दूर रखें, ताकि सोने से पहले उनका दिमाग बहुत ज्यादा एक्टिव न हो।
स्क्रीन टाइम पर कंट्रोल
डिजिटल डिवाइस, जैसे- मोबाइल, टैबलेट और टीवी से निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटोनिन के प्रोडक्शन को रोक देती है। इससे बच्चों का दिमाग एक्टिव हो जाता है और उन्हें नींद आने में परेशानी होती है। सोने से कम से कम एक से दो घंटे पहले सभी गैजेट्स बंद कर दें। स्क्रीन की जगह उन्हें कोई शारीरिक किताब पढ़ने या म्यूजिक सुनने की आदत डालें।
दिन भर एक्टिव रखें और सही डाइट दें
बच्चे की दिन भर की गतिविधियां सीधे तौर पर उनकी रात की नींद को प्रभावित करती हैं। जो बच्चे दिन में शारीरिक रूप से एक्टिव रहते हैं, उन्हें रात में जल्दी और गहरी नींद आती है। बच्चों को दिन में बाहर खेलने या शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें। साथ ही, शाम के समय उन्हें भारी खाना और चॉकलेट या कोल्ड ड्रिंक्स देने से बचें, क्योंकि ये चीजें उनकी नींद में बाधा डाल सकती हैं।
खुद से सोने की आदत डालें
अक्सर माता-पिता बच्चों को थपथपाकर या गोद में लेकर सुलाते हैं। हालांकि, यह प्यार जताने का तरीका है, लेकिन इससे बच्चा नींद के लिए पूरी तरह आप पर निर्भर हो जाता है। बच्चों को खुद से सोने की आदत डालें, ताकि अगर आप किसी काम में व्यस्त भी हों, तो वे खुद से सो सकें।
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