पार्टनर से अनबन के दौरान भूलकर भी न करें ये गलतियां, समय के साथ खोखला हो जाता है रिश्ता
मसला यह नहीं है कि झगड़ा कैसे रोका जाए, बल्कि मसला यह है कि झगड़े या बहस के दौरान कौन सी गलतियों से बचा जाए ...और पढ़ें

बहस के दौरान होने वाली वो गलतियां जो करती हैं रिश्ते को कमजोर (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। रिलेशनशिप में झगड़ा या बहस होना आम बात है। दो लोगों के साथ रहने से कभी न कभी किसी टॉपिक पर बहस न हो ऐसा तो हो नहीं सकता। ऐसे में मसला यह नहीं है कि झगड़ा कैसे रोका जाए, बल्कि मसला यह है कि झगड़े या बहस के दौरान कौन सी गलतियों से बचा जाए क्योंकि अक्सर ये गलतियां हंसते-खेलते रिश्ते पर भारी पड़ सकती हैं। फिर लोग जाने-अनजाने में ऐसी गलतियां कर भी देते हैं, जिसके बारे में उन्हें मालूम ही नहीं होता।
बहस के दौरान होने वाली वो गलतियां जो करती हैं रिश्ते को कमजोर
बहस या झगड़े के समय कपल ऐसी कई गलतियां करते हैं जो उनका रिश्ता कमजोर कर देती हैं:
पार्टनर के बारे में बुरा भला कहना
कपल अगर किसी बात पर बहस कर रहे हों और उसी समय एक दूसरे को बुरा भला कहना शुरू कर दें तो यह स्थिति बदतर हो जाती है। पार्टनर की बुराई करने की यह आदत बहस के टॉपिक को कहीं से कहीं ले जाती है। कई बार तो ऐसी स्थिति में बातचीत की गुंजाइश ही नहीं रह पाती।
खुद का बचाव करने लगना
अगर पार्टनर की गलती हो और वो अपनी गलती मानने के बजाय खुद का ही बचाव करने लग जाए तो यह स्थिति भी बहस को बिगाड़ देती है। यह समस्या का समाधान निकालने का नहीं, बल्कि खुद का बचाव करने वाली बहस बन जाती है।
स्टोनवॉल तकनीक का इस्तेमाल
यहां स्टोनवॉल से मतलब उस स्थिति से है, जिसमें बहस के समय एक पार्टनर बहस करने से बिल्कुल पीछे हट जाता है। वह सोल्यूशन की जगह इमोशनली रिजर्व रहना पसंद करता है, यह आदत दूसरे पार्टनर को मेंटली परेशान कर सकती है। इसमें एक पार्टनर बात करने की कोशिश में जुटा होता है, वहीं, दूसरा खुद को शट डाउन कर देता है।
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पुरानी लड़ाई या बहस को बीच में लाना
बहस का टॉपिक कोई और है और बात करते-करते पुरानी बातें भी बीच में ला देना। क्या आपको नहीं लगता यह तरीका मुद्दे से भटकना है और खुद को सही ठहराते हुए सामने वाले को दोष देना है? कई बार पार्टनर का इरादा ऐसा नहीं होता, लेकिन पुरानी बातें फिर से खोलने से यह सामने वाले को दुख दे सकता है। बहस के समय उसी टॉपिक पर टिके रहना जरूरी है, ताकि उसका समाधान जल्दी निकाला जा सके।