ब्लैक कॉफी पीने वालों में हो सकते हैं 'साइकोपैथ' के लक्षण, रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
एक स्टडी के मुताबिक, ब्लैक कॉफी पसंद करने वाले लोगों में असामाजिक लक्षण जैसे नार्सीसिज्म या सेडिज्म पाए जा सकते हैं। हालांकि, वैज्ञानिक इस संबंध को बह ...और पढ़ें

ब्लैक कॉफी खोलती है आपकी पर्सनैलिटी का यह दिलचस्प राज (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अगर आप उन लोगों में से हैं जो अपनी कॉफी बिल्कुल ब्लैक (बिना दूध और चीनी के) पीना पसंद करते हैं, तो हमारे पास आपके लिए एक बड़ी खबर है। शायद आपने अपने दोस्तों या परिवार से अक्सर यह सुना होगा कि "यह तो जहर जैसा कड़वा है," या "तुम्हारे टेस्ट बड्स में कुछ गड़बड़ है"।
आप शायद इन बातों को हंसी में टाल देते होंगे, लेकिन विज्ञान कहता है कि इन बातों में थोड़ी सच्चाई हो सकती है। जी हां, एक दशक पुरानी रिसर्च इन दिनों फिर से चर्चा में है, जो ब्लैक कॉफी पीने वालों को लेकर कुछ हैरान करने वाले दावे करती है।

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क्या कहती है रिसर्च?
इस रिसर्च का उद्देश्य यह देखना था कि क्या हमारे स्वाद और हमारे व्यक्तित्व के बीच कोई कनेक्शन है। सबसे चौंकाने वाला नतीजा यह रहा कि जो लोग कड़वे स्वाद (जैसे कि बिना चीनी की ब्लैक कॉफी) को पसंद करते हैं, उनमें असामाजिक लक्षण थोड़े ज्यादा पाए गए। रिसर्च के अनुसार, ऐसे लोगों में नार्सीसिज्म और सेडिज्म (दूसरों को दुख देने में आनंद आना) जैसे लक्षण देखने को मिले। इंटरनेट पर यह खबर आग की तरह फैल गई कि "ब्लैक कॉफी पीने का मतलब है कि आप साइकोपैथ हो सकते हैं।"
घबराएं नहीं, हकीकत कुछ और है
इससे पहले कि आप अपनी अमेरिकानो कॉफी को छोड़कर कैरामेल लाटे पीने लगें, जरा रुकिए। वैज्ञानिकों ने खुद कहा है कि इस रिसर्च के नतीजों को दिल पर लेने की जरूरत नहीं है। जी हां, विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लैक कॉफी और इन व्यक्तित्व लक्षणों के बीच का संबंध बहुत मामूली है। हमारा व्यक्तित्व सिर्फ कॉफी से नहीं बनता, बल्कि यह हमारी परवरिश, हमारे जींस और हमारे आस-पास के माहौल से आकार लेता है। स्वाद की पसंद इसमें सिर्फ एक बहुत छोटा-सा हिस्सा है।
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ब्लैक कॉफी और 'विलेन' का रिश्ता
यह विचार इसलिए भी मशहूर हो गया क्योंकि फिल्मों और किताबों ने ब्लैक कॉफी को हमेशा रहस्यमयी किरदारों से जोड़ा है। चाहे वह पुरानी फिल्मों का जासूस हो, परेशान लेखक हो, या रात के 3 बजे कोई साजिश रचने वाला मास्टरमाइंड- ब्लैक कॉफी हमेशा से गंभीर और 'डार्क' किरदारों की पसंद रही है।
इस स्टडी ने बस उस पुरानी धारणा को एक वैज्ञानिक तड़का लगा दिया। रिसर्च में लोगों से उनके स्वाद (मीठा, नमकीन, खट्टा, कड़वा) के बारे में पूछा गया था और उसे मनोवैज्ञानिक पैमानों से मिलाया गया। नतीजा यह निकला कि कड़वा पसंद करने वाले लोगों में असामाजिक लक्षण थोड़े ज्यादा थे, लेकिन यह कोई पर्सनैलिटी टेस्ट नहीं है।
लोग ब्लैक कॉफी क्यों पीते हैं?
हर कोई जो ब्लैक कॉफी पीता है, उसका कोई "डार्क साइड" हो, यह जरूरी नहीं है:
- कुछ लोग वास्तव में कड़वा स्वाद पसंद करते हैं।
- कुछ लोग लैक्टोज इनटॉलरेंट होते हैं (दूध नहीं पचा सकते)।
- कई लोग कैलोरी कम करने के लिए ब्लैक कॉफी पीते हैं।
- और कुछ लोगों को स्वाद से कोई फर्क नहीं पड़ता, उन्हें बस कैफीन चाहिए।
ब्लैक कॉफी लवर्स का सच
यह स्टडी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमारी छोटी-छोटी आदतें हमारे बारे में क्या-कुछ कहती हैं। अगर आपकी पसंद भी एक साधारण ब्लैक कॉफी है, तो रिलैक्स करें। यह आपको कोई 'सुपरविलेन' नहीं बनाती। ज्यादा से ज्यादा इसका मतलब यह है कि आपमें कड़वाहट सहन करने की क्षमता ज्यादा है और बकवास सहन करने की क्षमता कम। ईमानदारी से कहें तो, यह एक ऐसी खूबी है जिस पर बहुत से लोग गर्व करते हैं।