काजोल ने कैसे सुधारा अपनी Gen-Z बेटी न्यासा के साथ रिश्ता? हर पेरेंट के काम आएंगी ये टिप्स
काजोल ने हाल में एक वीडियो में बताया कि कैसे उन्होंने अपनी बेटी न्यासा के साथ अपना रिश्ता सुधारा। ...और पढ़ें

काजोल ने शेयर की पेरेंटिंग टिप्स (Picture Courtesy: Instagram)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बॉलीवुड की चुलबुली और बेबाक अभिनेत्री काजोल अपनी ऑन-स्क्रीन भूमिकाओं के लिए जितनी मशहूर हैं, असल जिंदगी में वह एक उतनी ही जागरूक मां भी हैं। काजोल और उनकी जेन-जी बेटी न्यासा देवगन की बॉन्डिंग आज सोशल मीडिया पर अक्सर चर्चा का विषय बनी रहती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह खूबसूरत रिश्ता रातों-रात नहीं बना?
काजोल ने हाल ही में लिली सिंह के साथ एक पॉडकास्ट में शेयर किया कि उन्होंने और न्यासा ने अपनी बॉन्डिंग को मजबूत करने के लिए सालों तक मेहनत की है।
जब हार्मोनल बदलाव और तकरार ने घेरा
काजोल बताती हैं कि एक लड़की का जीवन काफी मुश्किल से भरा होता है। मां-बेटी के रिश्ते में सबसे मुश्किल दौर तब आया जब न्यासा 12 साल की हुईं। काजोल ने कहा कि हॉर्मोन्स के असर और बढ़ती उम्र के कारण उनकी बेटी से उनकी हर छोटी बात पर काफी बहस होती थी। इस दौरान वे दोनों ही काफी इरेशनल और इललॉजिकल हो जाते थे।
इसके कारण उनकी बेटी के साथ उनके रिश्ते में काफी तनाव आ गया था और लगभग तीन साल तक उन्होंने इस खींचतान का सामना किया। स्थिति ऐसी थी कि दोनों ही एक-दूसरे को सुनने या बात करने के लिए तैयार नहीं थे।
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(Picture Courtesy: Instagram)
काजोल ने उठाया समझदारी भरा कदम
एक वयस्क और मां होने के नाते, काजोल को एहसास हुआ कि इस रिश्ते को बचाने के लिए उन्हें एक कदम पीछे हटना होगा। उन्होंने तय किया कि वह अब न्यासा से उतनी लड़ाई नहीं करेंगी। काजोल ने अपनी बेटी के साथ बातचीत करने की रणनीति बदली। उन्होंने न्यासा के साथ जितना हो सके उतना बात करने और उनके साथ मिलकर काम करने की कोशिश शुरू की।
खबरें और भी
काजोल का मानना है कि पेरेंटिंग का मतलब सिर्फ बच्चों को ऑर्डर देना नहीं है। उन्होंने महसूस किया कि उनकी सबसे बड़ी सीख यह थी कि वह अपनी बेटी के साथ बैठें और उसे सुनें।
जेन-जी बच्चों के पेरेंट्स के लिए सबक
काजोल की इस जर्नी में जेन-जी बच्चों के पेरेंट्स के लिए कुछ बहुत जरूरी सुझाव छिपे हैं-
- बोलने से ज्यादा सुनना जरूरी- पेरेंट्स के लिए सबसे जरूरी है कि वे अपने बच्चों की बात सुनें, खासकर अगर आपका बच्चा टीनएजर है। अपनी बात कहने से पहले बच्चों की बात को सुनना जरूरी है। बच्चों को यह महसूस करवाना जरूरी है कि आप उनके साथ हैं।
- स्पेस देना है जरूरी- बच्चों को अपनी बात रखने और खुद को समझने के लिए स्पेस देना बहुत जरूरी है। इससे बच्चा खुलकर पेरेंट्स से बात कर पाता है।
- धैर्य और समय- कोई भी रिश्ता एक दिन में नहीं सुधरता। बच्चों के साथ अपने रिश्ते को समय दें।
- ईगो को पीछे रखें- एक पेरेंट के तौर पर कभी-कभी झुकना और शांत रहना रिश्ते को टूटने से बचा सकता है।