तारीफ से डर और परवाह से बेचैनी- कहीं आप भी 'केयरगिवर बर्नआउट' के शिकार तो नहीं?
साइकोलॉजिस्ट डॉ. ललिता सुगलानी के मुताबिक, कुछ लोग दूसरों के लिए 'सेफ स्पेस' बनते हैं, पर जब उन्हें प्यार या तारीफ मिलती है तो वे घबरा जाते हैं... ...और पढ़ें

Caregiver Burnout: मजबूत बने रहने की वो आदत, जो आपको अंदर ही अंदर खाली कर रही है (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अगर आपने अपनी जिंदगी के कई साल सिर्फ दूसरों की देखभाल करने और उनका सहारा बनने में बिताए हैं, तो शायद आप यह भूल चुके हैं कि खुद की देखभाल करवाना कैसा लगता है। जी हां, साइकोलॉजिस्ट डॉ. ललिता सुगलानी के मुताबिक, केयरटेकर होने का मतलब अक्सर यह होता है कि आप दूसरों को प्यार और सुकून देने में तो बहुत अच्छे हैं, लेकिन आपने खुद कभी उस गहरे प्यार का अनुभव नहीं किया है। आप दूसरों को बहुत कुछ देते हैं, लेकिन बदले में आपको शायद ही कभी उस तरह की परवाह मिलती है।

(Image Source: AI-Generated)
हमेशा मजबूत बने रहने की आदत
अगर आप हमेशा दूसरों के लिए एक मजबूत इंसान बने रहे हैं- वह इंसान जो मुश्किल वक्त में हमेशा मौजूद रहता है, सबको सांत्वना देता है और यह सुनिश्चित करता है कि सब ठीक रहें, तो यह आदत आपके स्वभाव में गहराई से बस जाती है। इसी वजह से आप अनजाने में ऐसे लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं जिन्हें सहारे की जरूरत होती है, और आप हर किसी के लिए एक 'सेफ स्पेस' बन जाते हैं। यह आपके लिए इसलिए भी बहुत मायने रखता है क्योंकि आपको खुद कभी ऐसा सुरक्षित माहौल नहीं मिला, इसलिए आप इसे दूसरों को खुशी-खुशी बांटते हैं।
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तारीफ और प्यार से होने वाली घबराहट
यही सबसे बड़ा कारण है कि जब कोई अचानक आपको प्यार दिखाने लगता है या आपकी सच में परवाह करता है, तो आपको बहुत अजीब और असहज महसूस होता है। आपने जीवन भर सिर्फ खुद पर ही भरोसा करना सीखा है। इसलिए, अगर कोई आप पर कोई छोटा-सा एहसान करता है या आपकी तारीफ करता है, तो आप घबरा जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अचानक कोई आपको करीब से 'देख' रहा है और समझ रहा है, जबकि सच तो यह है कि आप भी अंदर से इसी प्यार और ध्यान के लिए तरस रहे होते हैं।
खुद से एक अंदरूनी जंग
कई बार यह स्थिति एक अंदरूनी लड़ाई जैसी लगने लगती है। आप प्यार और परवाह पाना तो बहुत चाहते हैं, लेकिन खुद को इसे महसूस करने की इजाजत नहीं देते। यह सब बहुत डरावना लग सकता है क्योंकि आपने कभी इसे स्वीकार करना सीखा ही नहीं है, और शायद आपको यह भरोसा भी नहीं होता कि यह प्यार सच है या नहीं।
इसलिए, साइकोलॉजिस्ट की सलाह है कि खुद के साथ थोड़ा धैर्य से पेश आएं और हमेशा याद रखें कि आप भी उसी तरह का प्यार और परवाह पाने के पूरे हकदार हैं, जो आप दूसरों को देते हैं।
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