एक लाइक और कमेंट से आ रही है रिश्तों में दरार? जानिए कैसे सोशल मीडिया बदल रहा है प्यार के मायने
सोशल मीडिया का असर हमारे रिश्तों पर भी पड़ता है। इसके कुछ पॉजिटिव असर हैं, तो कुछ नेगेटिव प्रभाव भी हैं। ...और पढ़ें

क्या रिश्तों के बीच आ रहा है सोशल मीडिया? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इस डिजिटल युग में सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, हम किसी न किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़े ही रहते हैं, लेकिन सवाल आता है कि इसका हमारे रिलेशनशिप पर क्या असर पड़ रहा है?
सोशल मीडिया कई तरीकों से रिश्तों को प्रभावित कर रहा है, खासकर डेटिंग पैटर्न को। आइए समझते हैं सोशल मीडिया का मॉडर्न रिलेशनशिप पर क्या असर पड़ रहा है।
दिखावा और तुलना करना
सोशल मीडिया की सबसे बड़ी चुनौती है दूसरों के रिश्ते से तुलना करना। लोग अक्सर अपनी असल जिंदगी की तुलना दूसरों के हाईलाइट रील से करने लगते हैं। जब कोई कपल अपनी वेकेशन या महंगे तोहफों की तस्वीरें पोस्ट करता है, तो देखने वाले को अपने रिश्ते में कमी महसूस होने लगती है। यह परफेक्ट कपल दिखने की होड़ असल खुशी से ज्यादा दिखावे पर फोकस हो गई है, जिससे रिश्तों में असंतोष बढ़ता है।
बातचीत में कमी
रिश्तों में फबिंग एक गंभीर समस्या बन गई है। इसका मतलब है साथ बैठे होने के बावजूद अपने पार्टनर को नजरअंदाज कर फोन में डूबे रहना। जब फिजिकली प्रेजेंट तो होते हैं, लेकिन मेंटल कनेक्शन गायब हो जाता है, तो रिश्तों में अकेलापन घर करने लगता है। डिनर टेबल पर बातचीत की जगह अब नोटिफिकेशन की आवाजों ने ले ली है, जिससे इमोशनल कनेक्शन में कम आ रही है।
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(Picture Courtesy: Freepik)
प्राइवेसी और इनसेक्योरिटी
सोशल मीडिया ने प्राइवेसी की सीमाओं को धुंधला कर दिया है। रिलेशनशिप स्टेटस अपडेट न करना या पार्टनर की फोटो पोस्ट न करना कभी-कभी शक और इनसेक्योरिटी का कारण बन जाता है। इसके अलावा, पुराने दोस्तों या अजनबियों के साथ ऑनलाइन बातचीत कभी-कभी माइक्रो-चीटिंग का रूप ले लेती है, जो भरोसे की नींव को हिला देती है। एक लाइक या कमेंट अक्सर गलतफहमियों और झगड़ों की वजह बन जाता है।
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दूरियों को कम करना
सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि सोशल मीडिया ने रिश्तों को एक नया सहारा दिया है। लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए वीडियो कॉल और इंस्टेंट मैसेजिंग किसी वरदान से कम नहीं हैं। यह कपल्स को मीलों दूर होने के बावजूद एक-दूसरे के जीवन का हिस्सा बने रहने में मदद करता है।
इंस्टेंट ग्रेटिफिकेशन
आजकल रिश्ते भी स्वाइप कल्चर का हिस्सा बन गए हैं। अगर किसी रिश्ते में छोटी-सी अनबन होती है, तो सोशल मीडिया हमें यह भ्रम देता है कि हमारे पास और भी बहुत सारे ऑप्शन मौजूद हैं। इस रिप्लेसेबिलिटी की भावना के कारण लोग रिश्तों को निभाने और समस्याओं को सुलझाने के बजाय उन्हें खत्म करना ज्यादा आसान समझते हैं।