चिल्लाने से जिद्दी हो रहे हैं बच्चे? शांत रहकर बच्चों को जिम्मेदार और समझदार बनाने के असरदार टिप्स
बिना डांटे अगर बच्चों को अपनी बात समझाई जाए, तो वे जल्दी उस बात को समझते हैं और फॉलो भी करते हैं। ...और पढ़ें
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बच्चों को ऐसे सिखाएं अनुशासन (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बच्चों की परवरिश में उन्हें अनुशासन सिखाना बेहद जरूरी होता है, लेकिन कई बार उनके पेरेंट्स गुस्से में आकर उनपर चिल्ला देते हैं। यह तरीका बच्चों के व्यवहार को सुधारने की जगह उन्हें डराने या भावनात्मक रूप से दूर करने का कारण बन सकता है।
ऐसे में आपके शांत, समझदारी भरे व्यवहार और पॉजिटिव नजरिए से, बच्चों में न केवल अनुशासन, बल्कि आत्मविश्वास, सहानुभूति और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होती है। अगर आप अपने बच्चे को बेहतर दिशा देना चाहते हैं, तो यहां बताए गए कुछ प्रभावी तरीकों को आजमाएं।
बच्चों को कैसे सिखाएं अनुशासन?
- शांति से बात करें- बच्चों से गुस्से में नहीं, बल्कि शांति से बात करें। जब आप शांत रहकर अपनी बात रखते हैं, तो बच्चा उसे ज्यादा गंभीरता से सुनता है। आपका धैर्य उसके लिए एक उदाहरण बनता है कि कैसे भावनाओं पर नियंत्रण रखा जा सकता है।
- सीमाएं तय करें- बच्चों को यह बताना जरूरी है कि उनसे क्या उम्मीदें की जा रही हैं। डिनर के बाद होमवर्क करना है या खिलौने खेलने के बाद वापस रखना है जैसी क्लीयर बाउंड्री तय करने से वे अपनी जिम्मेदारी समझते हैं।
- डांटे नहीं, गाइड करें- गलती पर तुरंत चिल्लाने के बजाय बच्चे को समझाएं कि उसने क्या गलत किया और क्यों उसे सुधारने की जरूरत है। उदाहरण के तौर पर कहें, “अगर तुमने खिलौने समेटे होते, तो कमरा और अच्छा लगता।”
- टाइम-इन अपनाएं, टाइम-आउट नहीं- बच्चे को दूर करने की जगह उसे अपने पास बैठाएं और उसके साथ बात करें। टाइम-इन में आप उसे शांत करते हुए समझाते हैं कि उसका व्यवहार क्यों गलत था।
- अच्छे व्यवहार की तारीफ करें- जब बच्चा कुछ अच्छा करे, उसकी सराहना करें, जैसे कि मुझे अच्छा लगा कि तुमने अपनी चीजें खुद रखीं। इससे बच्चे में पॉजिटिव काम दोहराने की प्रेरणा मिलती है।
- खुद उदाहरण बनें- बच्चे वही करते हैं जो वे देखते हैं। अगर आप गुस्से के बजाय संयम दिखाते हैं, तो वे भी वैसा ही करना सीखेंगे। घर का माहौल माता-पिता के व्यवहार से ही तय होता है, इसलिए पहले खुद वह बनें जो आप उन्हें सिखाना चाहते हैं।
- बच्चे की भावनाएं समझें- अक्सर बच्चा शरारत या गुस्सा इसलिए करता है क्योंकि वह थका, उदास या असुरक्षित महसूस कर रहा होता है। उससे पूछें, क्या कुछ परेशान कर रहा है? यह न केवल स्थिति को सुलझाता है, बल्कि आपसी रिश्ता भी मजबूत बनाता है।
- एक जैसे नियम और धैर्य रखें- डिसिप्लीन का सबसे अहम हिस्सा है निरंतरता। अगर आप कभी सख्त तो कभी लापरवाह होंगे, तो बच्चा कन्फ्यूज होगा। हर बार नियमों को एक समान बनाए रखें।