किताबें सिर्फ थ्योरी सिखाती हैं, जीना दादा-दादी सिखाते हैं! आज ही से बच्चों को दें बुजुर्गों का साथ
दादा-दादी और पोता-पोती के बीच रिश्ते को शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है। ...और पढ़ें

दादा-दादी से मिलने वाली सीख जो किताबों में नहीं मिलतीं (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। दादा-दादी और पोता-पोती के बीच रिश्ते को शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है। सबके बचपन का यह वो गोल्डन पीरियड होता है, जिसे वो चाहकर भी नहीं भुला सकते। जहां एक तरफ बड़े बुजुर्ग हमें प्यारी और मीठी यादें देकर जाते हैं तो वहीं उनसे हमें बहुत कुछ सीखने को भी मिलता है। भले ही यह तब न एहसास हो लेकिन समय के साथ समझ आने लगता है कि वो सीख कितनी अनमोल थी।
दादा-दादी से मिलने वाली सीख जो किताबों में नहीं मिलतीं
दादा-दादी जितना प्यार और दुलार करते हैं, उससे भी ज्यादा हमें जिंदगी जीने के बारे में सिखाते हैं। ऐसी कई सीख हैं जो उनके अलावा कोई नहीं सिखा सकता, किताबें भी नहीं।
रिश्तों की अहमियत
हमारे बड़े बुजुर्ग जब तक घर में रहते हैं, तब तक घर को जोड़कर रखते हैं। उनके रहते हमें पता चलता है कि किसी मुश्किल परिस्थिति में रिश्ते तोड़ने के बजाय उसे संभालना आना चाहिए। यह सीख अब समझ में आती है, जब लोग रिलेशनशिप बचाने के लिए एक्स्पर्ट्स की राय लेते नजर आ रहे हैं।
जो मिल है उसकी कद्र करो
हम सभी के दादा-दादी ने यह जरूर कहा होगा कि थोड़े में संतुष्ट होना सीखो और जो है पहले उसकी कद्र करना सीखो। दरअसल, वो हमें बड़े सपने देखने से नहीं रोक रहे थे, वो हमें ग्रेटीट्यूड सिखा रहे थे। हां, वही ग्रेटीट्यूड जिसे लोग आज खुद को पॉजिटिव रखने के लिए फॉलो कर रहे हैं।
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प्रकृति से जुड़ाव
पर्यवारण बचाने के लिए जिस तरह की मुहिम आज चल रही है, अगर हमने यह सीख अपने बड़ों से ले ली होती तो इसे सीखने की नौबत न आती। गार्डनिंग या नर्सरी का चलन बाद में आया, पेड़-पौधों की देखभाल से लेकर उन्हें पूजने तक, ये सभी लेसन हमें उन्हीं से मिले हैं।
मुसीबत को झेलना
मुसीबत को झेलने और ऐसी स्थिति में भी खुद को पॉजिटिव रखने की सीख भी दादा-दादी से मिली है। किसी परेशानी में उनका कहना कि ‘सब ठीक हो जाएगा’, ‘समय एक सा कभी नहीं रहता’ जिंदगी को देखने का एक पॉजिटिव दृष्टिकोण था।
सेहत से बड़ा कोई धन नहीं
क्या अपने घर में बड़ों को यह कहते सुना है कि ‘जान है तो जहान है’ या ‘सेहत से बड़ा कोई धन नहीं?’ अगर हां, तो बचपन की यह सीख आज भी आपके काम तो आ ही रही होगी। रोजाना की इस भागदौड़ में जब लोग खुद को अनदेखा करने लगते हैं, तब यह सीख अमल में लयनी चाहिए।