पुराने घरों में क्यों लगाते थे भारी-भरकम दो पल्ले वाले दरवाजे, खास है किवाड़ के इस डिजाइन की वजह
पुराने समय के घरों में दो पल्ले वाले दरवाजे लगाए जाते थे। ये दरवाजे लकड़ी के बने होते थे और काफी भारी हुआ करते थे। ...और पढ़ें

गांवों के पुराने घरों में क्यों होते थे दो पल्ले वाले भारी दरवाजे? (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल के घरों में सिंगल पैनल या स्लाइडिंग डोर देखने को मिलते हैं। शहरों के साथ-साथ अब गांवों में भी ऐसे ही दरवाजे देखने को मिलते हैं, लेकिन एक वक्त था जब घरों में दो पल्ले वाले दरवाजे ही लगाए जाते थे।
पुराने समय में घरों में दो पल्ले वाली किवाड़ें ही देखने को मिलती थीं। दो पल्ले वाले भारी-भरकम दरवाजे लगाने के पीछे सिर्फ डिजाइन या एस्थेटिक्स नहीं, बल्कि उस समय की जरूरतें भी छिपी थीं। आइए जानें क्यों पुराने घरों में दो पल्ले वाले दरवाजे लगाए जाते थे।
चौड़े रास्ते की सुविधा
पुराने जमाने में परिवार बड़े होते थे और सभी साथ रहते थे। ऐसे में शादियों या किसी खास आयोजन पर घर में लोगों की भीड़ बढ़ जाती थी। ऐसे में दो पल्ले दरवाजों का फायदा होता था कि इन्हें पूरा खोलने पर बहुत चौड़ा रास्ता मिल जाता था, जिसे अंदर-बाहर जाना आसान हो जाता था। साथ ही, भारी सामान, जैसे- अनाज के बड़े बोरे या शादी के समय बड़े बक्से आदि आसानी से घर के अंदर-बाहर आ-जा सकते थे।
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(AI Generated Image)
घर की प्राइवेसी
घर की प्राइवेसी के लिए भी पहले लोग दो पल्ले के दरवाजे लगवाते थे। अगर किसी बाहरी व्यक्ति से बात करनी हो या कोई छोटा सामान लेना-देना हो, तो पूरा दरवाजा खोलने के बजाय सिर्फ एक पल्ला खोला जाता था। इससे घर के अंदर कोई झांक नहीं पाता और प्राइवेसी बनी रहती थी।
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भारी लकड़ी का वजन संभालना
पुराने समय में दरवाजे आज की तरह प्लाईवुड या खोखले बोर्ड से नहीं बनते थे। इन्हें सागौन, शीशम, महुआ या नीम की भारी लकड़ी से बनाया जाता था। सिंगल पैनल का बड़ा दरवाजा बनाने पर उसका वजन इतना ज्यादा हो जाता था कि उसे संभालने के लिए दीवारों और कब्जों पर बहुत भारी दबाव पड़ता था। ऐसा दरवाजा जल्दी ही टूट सकता था। दरवाजे को दो हिस्सों में बांटने से वजन बराबर दो भागों में बंट जाता था, जिससे उन्हें खोलना और बंद करना बहुत आसान हो जाता था और दरवाजे सदियों तक बिना खराब हुए टिके रहते थे।
रोशनी और हवा का वेंटिलेशन
पुराने घरों को इस तरह डिजाइन किया जाता था कि अंदर रोशनी और हवा आराम से आ सकें। दो पल्ले के दरवाजों को आधा या पूरा खोलकर हवा के फ्लो को कंट्रोल किया जा सकता था, जिससे क्रॉस वेंटिलेशन होता था। वहीं अगर बहुत तेज हवा चलने पर एक पल्ला बंद कर दिया जाए, तो हवा घर में भी आएगी, लेकिन उसका तेज झोंका नहीं आएगा।