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    क्यों पुराने घरों में बनाई जाती थी उंची चौखट? घर के इस डिजाइन के पीछे छिपे थे कई लॉजिक

    Updated: Sat, 27 Jun 2026 09:48 AM (IST)

    हमारी नानी-दादी के जमाने के घरों में चौखट काफी ऊंची हुआ करती थी। ऐसे ऊंची चौखट बनाने के पीछे कुछ कारण छिपे थे। ...और पढ़ें

    पुराने घरों के दरवाजों में क्यों होती थी ऊंची चौखट? (AI Generated Image)

    पुराने घरों के दरवाजों में क्यों होती थी ऊंची चौखट? (AI Generated Image)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के घरों की चौखट बिल्कुल सपाट होती हैं, लेकिन पहले के समय में ऐसा नहीं था। पुराने जमाने के घरों में चौखट 3-6 इंच ऊंची बनाई जाती थी। इस चौखट को लांघकर ही कोई भी घर के अंदर आ सकता था, लेकिन इतनी चौखट बनाने की जरूरत क्या थी?  

    घर में ऊंची चौखट बनाने के पीछे कई सारे कारण छिपे थे, जिनके बारे में जानकर आप शायद हैरान हो जाएं। पुरानी परंपरा, मान्यताओं और रोजमर्रा की जरूरतों की वजह से पुराने घरों में चौखट ऊंची बनाई जाती थी। आइए जानें इन वजहों के बारे में। 

    कीड़े-मकौड़ों और सांप-बिच्छू से बचाव

    पुराने समय में ज्यादातर कच्चे मकान हुआ करते थे और उनके आसपास पेड़-पौधे, झाड़ियां और खेत होना आम बात थी। ऐसे माहौल में जहरीले सांप, बिच्छू, कनखजूरे और दूसरे कीड़े-मकौड़ों के घर में घुसने का खतरा बना रहता था। इन्हें घर में घुसने से रोकने के लिए जमीन से 3-6 इंच ऊंची उठी हुई चौखट बनाई जाती थी। ऊंची चौखट इन जीवों के लिए रुकावट का काम करती थी और वे आसानी से घर में नहीं घुस पाते थे। 

    धूल, मिट्टी और बरसात के पानी को रोकना

    पुराने समय में सड़कें भी पक्की नहीं थी, जिसके कारण हवा के साथ धूल-मिट्टी उड़कर घर के अंदर आ जाती थी। ऊंची देहरी होने की वजह से बाहर धूल सीधे घर के कमरों तक नहीं पहुंच पाती थी। इसके अलावा, बारिश के मौसम में जब बाहर पानी भर जाता था, तो ऊंची चौखट एक बांध की तरह काम करती थी और बरसात के पानी को घर में घुसने से रोकती थी। 

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    (AI Generated Image)

    सुरक्षा और मजबूती 

    पुराने जमाने में आज की तरह सीमेंट वाले फर्श नहीं हुआ करते थे। कच्ची या मिट्टी की जमीन पर लकड़ी के दरवाजे लगाना बहुत मुश्किल काम था। इसलिए दरवाजे के दोनों पल्लों को मजबूती से जकड़कर रखने के लिए चारों तरफ का मजबूत लकड़ी का फ्रेम बनाया जाता है और इसके नीचे लकड़ी या पत्थर की पट्टी डाली जाती थी। इससे चौखट की पकड़ मजबूत हो जाती थी और दरवाजा सालों-साल तक मजबूती से टिका रहता था।  

    इसके अलावा, पुराने समय में सुरक्षा के लिए दरवाजों के नीचे भी कुंडे लगाए जाते थे, ताकि दरवाजा आसानी से टूट न सके। इस निचले कुंडे को फंसाने के लिए भी ऊंची चौखट बेहद मददगार साबित होती थी। 

    मर्यादा और संस्कार

    ऊंची चौखट का सांस्कृतिक महत्व भी है। पुराने समय में इसे घर की मर्यादा की मर्यादा माना जाता था। जब भी घर के बड़े-बुजुर्ग या बाहरी व्यक्ति अंदर आते थे, तो वे इस चौखट को लांघने से पहले अपनी चप्पल खटखटाकर या आवाज देकर अंदर आते थे, ताकि महिलाओं के संभलने और पर्दा करने का समय मिल सके। 

    झुककर आने का जीवन संदेश

    कुछ मान्यताओं के अनुसार, दरवाजे की चौखट को इस तरह डिजाइन किया जाता था कि व्यक्ति जब भी घर के अंदर कदम रखे, तो वह थोड़ा ठहरकर और झुककर अंदर आए। यह इस बात का प्रतीक था कि मनुष्य जब भी किसी के घर या अपनों के बीच आए, तो अपने अहंकार को बाहर छोड़कर घर में प्रवेश करे।

    धार्मिक मान्यता

    ऐसी भी मान्यता है कि घर की चौखट देवी लक्ष्मी का स्थान है। इसलिए लोग अपने घर की चौखट की पूजा करते और वहां रंगोली बनाते थे।