आप भी अपने पार्टनर के साथ शेयर करते हैं हर बात? अट्रैक्शन बनाए रखने के लिए जरूरी है प्राइवेसी और स्पेस
रिश्ते में हर बात शेयर करना रिलेशनशिप के स्पार्क को खत्म कर देता है। इसके कारण रिश्ते में बोरियत आने लगती है और दूरियां बढ़ सकती हैं। इसलिए रिलेशनशिप ...और पढ़ें

पार्टनर के साथ हर बात शेयर करना कितना सही? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर हमें सिखाया जाता है कि एक मजबूत रिश्ते की नींव खुली बातचीत और पूरी ईमानदारी पर टिकी होती है। लोग मानते हैं कि अपने साथी से हर छोटी-बड़ी बात शेयर करना प्यार की निशानी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जरूरत से ज्यादा बातचीत, जिसे ओवरकम्युनिकेशन कहा जाता है, आपके रिश्ते में आकर्षण को खत्म कर सकती है और दूरियां बढ़ा सकती है?
हेल्दी रिश्ते के लिए जितना जरूरी बातचीत है, उतनी ही जरूरी प्राइवेसी और स्पेस भी है। आइए समझते हैं कि क्यों हर बात बताना हमेशा फायदेमंद नहीं होता।
जब बातचीत बन जाए ओवरप्रोसेसिंग
रिश्ते में अपने हर इमोशन को बिना सोचे-समझे तुरंत बयां कर देना कई बार भारी पड़ सकता है। इसे ओवरप्रोसेसिंग कहा जाता है। जब आप अपने इमोशन्स को समझे बिना ही उन्हें सामने वाले पर डाल देते हैं, तो इससे रिश्ते में भ्रम और थकावट बढ़ती है।
हर समय यह पूछते रहना कि क्या सब ठीक है? या क्या हमारा रिश्ता सही दिशा में जा रहा है? क्लैरिटी के बजाय साथी के मन में ऊब और तनाव पैदा कर सकता है। बार-बार वैलिडेशन चाहने की यह आदत पार्टनर को मानसिक रूप से थका देती है।
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(Picture Courtesy: Freepik)
स्पेस और रहस्य का महत्व
रिश्ते में कुछ बातें अनकही रहना भी जरूरी हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आप हर छोटी बात, जैसे- कल दोपहर क्या खाएंगे या हर पल क्या सोच रहे हैं, जैसी छोटी-छोटी बातें शेयर करते हैं, तो धीरे-धीरे रिश्ते से सहजता खत्म होने लगती है।
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रिश्ते में थोड़ी सीक्रेसी या कुछ बातें अपने तक रखना अट्रैक्शन को बनाए रखता है। जब आप पार्टनर को हर छोटी-छोटी बात पर क्लैरिफिकेसन देना बंद करते हैं और रिश्ते पर भरोसा करना सीखते हैं, तो इससे एक-दूसरे के लिए सम्मान और सुरक्षा की भावना बढ़ती है।
हर पहलू पर लगातार बात करना, जैसे- हमें क्या बदलना चाहिए या हम कैसे मिलते हैं रिश्ते को एक प्रोजेक्ट की तरह बना देता है, जो पार्टनर के लिए काफी मुश्किल भरा हो जाता है।
हेल्दी एक्सप्रेशन या ओवरकम्युनिकेशन?
हालांकि, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आप अपने पार्टनर से बातें छिपाएं या भावनाएं जाहिर न करें। यहां यह समझना जरूरी है कि कब बोलना जरूरी है और कब चुप रहना सही है। अपने जीवन या रिश्ते से जुड़े जरूरी मुद्दों पर बात करना जरूरी है, ताकि आपके पार्टनर को ऐसा न लगे कि आप उनके मत को अहमियत नहीं देते।
लेकिन अपनी भावनाओं को शेयर करने से पहले खुद उन पर विचार करना जरूरी है, क्या यह बात अभी बताना जरूरी है? क्या इससे रिश्ते में कोई अच्छा बदलाव आएगा?, इन बातों के बारे में जरूरी सोच लें। जब आप जरूरी बातों को सही समय पर शेयर करते हैं, तो आपकी बातचीत ज्यादा बैलेंस और असरदार बनती है।
भरोसे को दें जगह
एक बेहतरीन रिश्ता वह है जहां शब्दों से ज्यादा भरोसे की जगह हो। हर छोटी बात पर साथी का कन्फर्मेशन मांगना बंद करें और रिश्ते को सांस लेने के लिए थोड़ी जगह दें। जब आप पार्टनर को स्पेस देते हैं, तो वह दूरी नहीं बल्कि एक-दूसरे के लिए सम्मान और आकर्षण को और बढ़ाता है।