अनजाने में पेरेंट्स कैसे चुन लेते हैं अपना 'फेवरेट चाइल्ड'? क्या होता है भाई-बहनों पर इस बात का असर
माता-पिता अनजाने में ही किसी एक बच्चे को अपना 'फेवरेट' बना लेते हैं, जिसके पीछे स्वभाव या पढ़ाई-लिखाई जैसे कई कारण हो सकते हैं। ...और पढ़ें

कैसे बन जाता है कोई एक बच्चा माता-पिता का 'फेवरेट'? (Image Source: AI-Generated)
HighLights
माता-पिता अनजाने में किसी एक बच्चे को 'फेवरेट' बना लेते हैं
गैर-फेवरेट बच्चों में आत्मविश्वास की कमी और जलन पैदा होती है
'फेवरेट' बच्चे पर हमेशा उम्मीदों पर खरा उतरने का दबाव रहता है
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। "हम अपने सभी बच्चों से बराबर प्यार करते हैं!" दुनिया के हर माता-पिता यही कहते हैं, और दिल से वे ऐसा ही मानते भी हैं। कोई भी माता-पिता जानबूझकर अपने बच्चों में भेदभाव नहीं करना चाहता, लेकिन मनोविज्ञान कहता है कि कई बार पेरेंट्स अनजाने में ही किसी एक बच्चे की तरफ ज्यादा झुकाव रखने लगते हैं, जिसे बोलचाल की भाषा में 'फेवरेट चाइल्ड' कहा जाता है।

(Image Source: AI-Generated)
आखिर अनजाने में कैसे होता है यह भेदभाव?
यह स्थिति अक्सर बहुत ही स्वाभाविक कारणों से पैदा होती है। कई बार यह स्वभाव के मिलने की वजह से होता है। अगर कोई बच्चा माता-पिता की तरह ही शांत या समझदार है, तो उससे अपने-आप एक गहरा रिश्ता बन जाता है। कभी-कभी घर का सबसे बड़ा बच्चा- जिसने माता-पिता को पहली बार माता-पिता बनने का एहसास कराया या घर का सबसे छोटा बच्चा, जिससे सभी लाड करते हैं- अनजाने में फेवरेट बन जाता है। इसके अलावा, जो बच्चा पढ़ाई में अच्छा होता है, बात जल्दी मान लेता है या कम शिकायतें करता है, पेरेंट्स उसकी तारीफ ज्यादा करने लगते हैं।
दूसरे भाई-बहनों पर इसका क्या असर होता है?
इस अनजाने भेदभाव का दूसरे बच्चों पर बहुत गहरा और जीवन भर रहने वाला असर हो सकता है। जिस बच्चे को यह महसूस होने लगता है कि वह माता-पिता का 'फेवरेट' नहीं है, उसके अंदर धीरे-धीरे आत्मविश्वास की कमी होने लगती है। बचपन में ही उसके मन में यह बात घर कर जाती है कि "शायद मुझमें ही कोई कमी है" या "मैं प्यार के लायक नहीं हूं।"
भाई-बहनों के आपसी रिश्ते में दरार
इस स्थिति का सबसे बुरा असर भाई-बहनों के पवित्र रिश्ते पर पड़ता है। जो बच्चा खुद को कमतर महसूस करता है, उसके मन में अपने ही 'फेवरेट' भाई या बहन के लिए जलन और चिढ़ पैदा हो सकती है। वे आपस में दोस्त बनने के बजाय जीवन भर के लिए प्रतिद्वंद्वी बन जाते हैं। कई बार ऐसे बच्चे माता-पिता का ध्यान खींचने के लिए बहुत जिद्दी हो जाते हैं या जानबूझकर गलत काम करने लगते हैं।
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'फेवरेट चाइल्ड' के लिए भी यह आसान नहीं होता
आपको जानकर शायद हैरानी होगी, लेकिन जो बच्चा माता-पिता का फेवरेट होता है, उसके लिए भी यह स्थिति बहुत अच्छी नहीं होती। उस बच्चे पर हमेशा 'परफेक्ट' बने रहने और माता-पिता की उम्मीदों पर खरा उतरने का भारी दबाव होता है। उन्हें हमेशा यह डर सताता है कि अगर उनसे कोई गलती हुई, तो वे माता-पिता का वह खास प्यार खो देंगे।
क्या है समाधान?
पेरेंट्स के लिए सबसे जरूरी कदम है इस बात को स्वीकार करना कि हर बच्चा अलग होता है। कभी भी अपने एक बच्चे की तुलना दूसरे से न करें। अपने हर बच्चे के साथ अकेले में समय बिताएं और उनकी खूबियों को पहचानें। प्यार सिर्फ बराबर होना ही काफी नहीं है, बल्कि आपके हर बच्चे को वह प्यार बराबर महसूस भी होना चाहिए।