6 साल के बच्चे स्कूल से अकेले आते हैं घर! Swiss Parenting में ऐसा क्या खास है जो भारत में नहीं?
बच्चों की बेहतरीन परवरिश कैसे की जाए, यह सवाल हर माता-पिता के मन में रहता है। ...और पढ़ें

बाकी दुनिया से अलग क्यों है स्विस पैरेंटिंग? एक्सपर्ट ने बताईं वो 3 बातें जो हर माता-पिता को सीखनी चाहिए (Image Source: AI-Generated)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बच्चों की परवरिश करना एक बड़ी जिम्मेदारी होती है और दुनिया भर में इसके अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं। इसी विषय पर दिल्ली के निर्माण विहार स्थित 'रेडिक्स हेल्थकेयर' के चेयरमैन और वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ, डॉ. रवि मलिक ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए स्विट्जरलैंड की पेरेंटिंग से जुड़ी तीन बेहद अनोखी और जरूरी बातों का जिक्र किया है।
डॉ. मलिक का मानना है कि भारत के माता-पिता को भी स्विट्जरलैंड के लोगों से ये बातें जरूर सीखनी चाहिए। आइए जानते हैं क्या हैं वो परवरिश के 3 खास तरीके।

(Image Source: AI-Generated)
बच्चों को कम उम्र में ही आत्मनिर्भर बनाना
स्विट्जरलैंड में बच्चों को बहुत छोटी उम्र से ही खुद पर भरोसा करना सिखाया जाता है। वहां दोपहर 12 बजे के बाद, महज 6 से 7 साल की उम्र के छोटे बच्चे स्कूल से पैदल अकेले अपने घर जाते हैं। घर जाकर वे अपने माता-पिता के साथ क्वालिटी टाइम बिताते हैं, खाना खाते हैं और उसके बाद फिर से स्कूल लौट जाते हैं।
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पब्लिक प्लेस पर बच्चों का पूरा सम्मान
वहां के माता-पिता इस नियम का बहुत सख्ती से पालन करते हैं कि वे अपने बच्चों को किसी भी पब्लिक प्लेस पर बिल्कुल न डांटें। वे बच्चों पर बाहर न तो कभी चिल्लाते हैं और न ही उन्हें किसी के सामने शर्मिंदा करते हैं। इस तरह बच्चों के आत्मसम्मान को कभी ठेस नहीं पहुंचाई जाती।
मौसम चाहे जो भी हो, आउटडोर खेल हैं जरूरी
स्विट्जरलैंड में बच्चों को घरों के ओवरप्रोटेक्टेड माहौल में कैद करके नहीं रखा जाता। बाहर चाहे बर्फबारी हो रही हो या तेज धूप निकली हो, बच्चों को हर दिन कम से कम दो घंटे के लिए घर से बाहर खेलने के लिए जरूर भेजा जाता है। बच्चों के बाहरी विकास के लिए वहां लगभग हर जगह आउटडोर प्ले एरिया बनाए गए हैं।
भारतीय माता-पिता के लिए अहम सीख
डॉ. रवि मलिक की सलाह है कि स्विट्जरलैंड की ये तीनों आदतें बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बहुत बेहतरीन हैं। भारतीय माता-पिता को भी इन बातों से सीख लेनी चाहिए और अपने बच्चों की परवरिश करते समय इन तरीकों को भारत में भी जरूर लागू करना चाहिए।