क्या आप PTM को समझते हैं बच्चों का 'शिकायत सेशन'? तो सीख लें कैसे पेरेंट्स को मीटिंग के लिए होना चाहिए तैयार
क्या आप भी टीचर से बच्चे की शिकायत सुनकर उनपर चिल्लाने लगते हैं? जानें ऐसी ही गलतियां जिन्हें पीटीएम में करने से बचना चाहिए। ...और पढ़ें

पीटीएम में पेरेंट्स को कुछ बातों का रखना चाहिय खास ध्यान (Image Source: AI Generaed)
HighLights
बच्चे की क्लास भागीदारी, दोस्तों और व्यवहार को समझें
शिकायतों से बचें, बच्चे की खूबियों पर ध्यान केंद्रित करें
PTM में मानसिक रूप से तैयार रहें, शिष्टाचार बनाए रखें
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कुछ पेरेंट्स पीटीएम को बच्चों की शिकायत करने के एक सुनहरे मौके की तरह देखते हैं। जबकि हर महीने होने वाली पेरेंट्स टीचर मीटिंग बच्चों की रिपोर्ट कार्ड देखने के लिए नहीं होती। यह उनकी खूबी जानने का भी अच्छा अवसर होता है जो उनके भविष्य की प्लानिंग करने में मदद कर सकता है।
वहीं, कई बार जल्दबाजी में पेरेंट्स मीटिंग में बस उपस्थित हो जाते हैं लेकिन पूरी तैयारी नहीं करके जाते। इन सबसे से बचने के लिए जरूरी है कि पीटीएम में जाते समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाए।
बच्चे की भागीदारी जानें
सिर्फ यह मायने नहीं रखता कि बच्चा समय पर होमवर्क कर रहा है, इसके साथ क्लास में उसकी भागीदारी भी उतनी ही मायने रखती है। यह उसकी इंटरपर्सनल स्किल्स के डेवलपमेंट के लिए जरूरी है। पेरेंट्स टीचर से हमेशा यह सवाल करें कि बच्चा क्लास में कितने सवाल पूछता है, किस तरह बातचीत करता है और एक्टिविटी में हिस्सा लेता है या नहीं।
कितने और कैसे दोस्त हैं
छोटी उम्र में बच्चे की संगति ही आगे चलकर उसका व्यवहार और जीवनशैली की आदतें तय करती हैं। ऐसे में इस बारे में पेरेंट्स को पता होना चाहिए कि क्लास में वह किन दोस्तों के साथ रहता है और कितने दोस्त हैं। जितना बड़ा बच्चे का फ्रेंड सर्कल होगा वह उसके एक्सट्रोवर्ट नेचर के बारे में बताएगा।
सिर्फ शिकायतें न करते जाएं
पीटीएम इंटरेक्शन बच्चों की शिकायतों के लिए नहीं होता है, इस दौरान पेरेंट्स को उनकी गलतियों को टीचर के सामने जरूरत से ज्यादा हाइलाइट करने से बचना चाहिए। इसके बजाय, टीचर से खूबी जानने की कोशिश करें ताकि बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ सके। दोनों ही बातों में इतना बैलेंस बनाकर रखें कि नेगेटिव या पॉजिटिव का पलड़ा भारी न हो।
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खुद को मेंटली तैयार रखें
अगर आपका बच्चा पढ़ाई में बहुत होनहार है तो इस खुशी से मीटिंग में न जाएं कि उसकी गलती सुनने पर आपका गुस्सा बच्चे के ऊपर भारी पड़े। इसी तरह अगर वह पढ़ाई में एवरेज है तो उसकी तारीफ सुनने और बच्चे को शाबाशी देने से भी न झिझकें। इसी वजह से पीटीएम से पहले पेरेंट्स को मेंटली रेडी रखना अनिवार्य शर्त है।
अपना शिष्टाचार बनाएं रखें
मीटिंग में शिकायत सुनने पर तुरंत बच्चे को डांटने या अपना गुस्सैल रवैया दिखाने से बचना चाहिए। इससे परवरिश पर सवाल उठ सकता है। बच्चे पर भी बुरा असर पड़ता है क्योंकि आप नहीं जानते कि उनके मन में क्या चल रहा है।