घोस्टिंग से भी ज्यादा खतरनाक है 'घोस्टलाइटिंग', कहीं आपका पार्टनर भी तो नहीं खेल रहा ये टॉक्सिक गेम?
आजकल की डेटिंग में घोस्टलाइटिंग एक नया और खतरनाक ट्रेंड है, जो घोस्टिंग और गैसलाइटिंग से मिलता-जुलता और बेहद टॉक्सिक रूप है। ...और पढ़ें

'घोस्टलाइटिंग' क्या है और यह आपके मेंटल हेल्थ को कैसे प्रभावित कर रहा है? (Image Credit - Canva)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जेन जी की डेटिंग की दुनिया में रिश्ते जितनी तेजी से बनते हैं, उतनी ही जल्दी टूट भी जाते हैं। सोशल मीडिया के जमाने में प्यार और ब्रेकअप से जुड़े कई नए ट्रेंड सुनने को मिलते रहते हैं। कभी सिचुएशनशिप चर्चा में था, तो कभी घोस्टिंग, जिसमें पार्टनर बिना कुछ कहे अचानक गायब हो जाता है। अब इसी से जुड़ा एक नया ट्रेंड सामने आया है, घोस्टलाइटिंग। यह डेटिंग का ऐसा टॉक्सिक ट्रेंड है जो घोस्टिंग से भी ज्यादा परेशान करने वाला माना जा रहा है।
'घोस्टलाइटिंग' शब्द 'घोस्टिंग' और 'गैसलाइटिंग' का कॉम्बिनेशन है। यह कोई नया ट्रेंड नहीं है, बल्कि सालों से चला आ रहा एक ऐसा बिहेवियर है जिसकी पहचान करना काफी मुश्किल है। इसमें आप एक ऐसी उलझन में फंस जाते हैं जहां आपका पार्टनर न तो पूरी तरह से आपके साथ होता है और न ही आपको छोड़ता है। यहां न तो पूरी तरह से गैसलाइटिंग होती है और न ही घोस्टिंग।

(Picture Credit- AI Generated)
घोस्टलाइटिंग का मतलब सिर्फ रिश्ता खत्म करना या कॉल, मैसेज और सोशल मीडिया से अचानक गायब हो जाना नहीं है, बल्कि जाने से पहले सामने वाले को यह यकीन दिला देना कि तुम ही गलत हो। यह आपके सेल्फ-कॉन्फिडेंस को खत्म कर देता है और आपको गहरे कन्फ्यूजन में भी डाल देता है।
घोस्टिंग से भी खतरनाक है घोस्टलाइटिंग
आजकल बिना बताए गायब होना पुरानी बात हो गई है, अब घोस्टलाइटिंग ने इसे और भी टॉक्सिक बना दिया है। इसमें पार्टनर सिर्फ रिश्ता छोड़कर भागता ही नहीं, बल्कि जाने से पहले आपको मेंटली मैनिपुलेट भी करता है। इसमें पार्टनर बात को इस तरह घुमाता है या झूठ बोलता है कि आपको लगता है कि गलती आपकी ही है, जिससे आप खुद को गलत मानने लगते हैं।
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कैसे असर डालता है यह ट्रेंड?
घोस्टलाइटिंग में अक्सर पार्टनर दूर होने से पहले ऐसी बातें करता है, जिससे पार्टनर को लगे कि शायद उसी की वजह से रिलेशनशिप खराब हुआ है। जैसे वह कह सकता है कि तुम ऑफिस के काम में बिजी थे, इसलिए मैंने तुम्हें परेशान नहीं किया। ऐसे में सामने वाले पार्टनर को खुद को ही गलत मानने पर मजबूर हो जाता है और सोचता है कि शायद कहीं न कहीं गलती मेरी ही थी जिसकी वजह से हमारा रिश्ता खत्म हुआ।