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    नए कपल्स के लिए 'मनी टॉक' क्यों है जरूरी और पैसों से जुड़े किन मुद्दों पर जरूर करें बात

    Updated: Thu, 19 Feb 2026 01:31 PM (GMT+05:30)

    रिश्ते की शुरुआत में पैसों के बारे में बात करने से कतराना बाद में बहस और झगड़े शुरू हो सकते हैं। लोन, इंवेस्टमेंट, स्पेंडिंग हैबिट्स के बारे में बात क ...और पढ़ें

    पार्टनर से पैसों के बारे में कैसे करें बात? (AI Generated Image)

    पार्टनर से पैसों के बारे में कैसे करें बात? (AI Generated Image)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कहा जाता है कि प्यार में हिसाब-किताब नहीं होता, लेकिन हकीकत यह है कि पैसों के सही तालमेल के बिना सबसे मजबूत रिश्ते में भी दरार आ सकती है। अक्सर नए कपल्स रोमांस के शुरुआती दिनों में पैसों जैसे गंभीर मुद्दे पर बात करने से कतराते हैं।

    उन्हें डर होता है कि कहीं वे लालची या अटपटा न लगें, लेकिन एक इस बारे में बात करना काफी जरूरी है। आइए जानते हैं कि रिश्तों में मनी टॉक क्यों जरूरी है और इससे जुड़े किन मुद्दों पर बात करना बेहद जरूरी है।

    पैसों पर बात करना क्यों जरूरी है?

    • तनाव और विवादों से बचाव- आर्थिक असहमति रिश्तों के टूटने या झगड़ों का एक बड़ा कारण हो सकती है। जब आप पहले से इस बारे में क्लीयर होते हैं, तो भविष्य में अचानक आने वाले खर्चों या कर्ज को लेकर बहस की स्थिति नहीं बनती।
    • एक जैसे गोल्स- चाहे घर खरीदना हो, वेकेशन प्लान करना हो या रिटायरमेंट, बिना फाइनेंशियल प्लानिंग के ये सपने अधूरे रह सकते हैं। पैसों पर बात करने से आप एक टीम की तरह काम कर पाते हैं।
    • विश्वास की नींव- अपनी सैलेरी, सेविंग्स और खर्च करने की आदतों के बारे में खुलकर बताना आपके पार्टनर के लिए आपकी ईमानदारी और गंभीरता को दिखाता है।
    Money Talk
    (AI Generated Image)

    पैसों से जुड़े किन मुद्दों पर जरूर बात करनी चाहिए?

    • खर्च करने की आदतें- क्या आप एक सेवर हैं या स्पेंडर? यानी आप बिना सोंचे पैसे खर्च कर देते हैं या आप बचत पर ध्यान देते हैं? अक्सर एक पार्टनर कंजूस और दूसरा खर्चीला हो सकता है। यह जानना जरूरी है कि आपकी प्राथमिकताएं क्या हैं, क्या आप पैसों को इंवेस्ट करना चाहते हैं या घूमने-फिरने पर खर्च करना।
    • मौजूदा कर्ज- रिश्ते में आने से पहले एक-दूसरे के क्रेडिट कार्ड लोन, एजुकेशन लोन या किसी भी तरह के कर्ज के बारे में बताना बहुत जरूरी है। यह छिपाने से बाद में बड़ा विश्वासघात महसूस हो सकता है, क्योंकि एक पार्टनर का कर्ज भविष्य में दोनों के फाइनेंस को प्रभावित करता है।
    • जॉइन्ट और सेपरेट अकाउंट्स- क्या आप अपने सारे खर्च एक जॉइंट अकाउंट से करेंगे या अपनी सैलरी का एक हिस्सा अलग रखेंगे? इसका कोई एक सही जवाब नहीं है, लेकिन यह तय करना जरूरी है कि घर के बिजली बिल, रेंट और राशन के खर्चों का बंटवारा कैसे होगा।
    • लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल गोल्स- अगले 5 या 10 वर्षों में आप खुद को कहां देखते हैं? क्या आप जल्दी रिटायर होना चाहते हैं? क्या आप स्टॉक मार्केट में रिस्क लेना पसंद करते हैं या सुरक्षित स्कीम, जैसे FD में इंवेस्ट कनरे में यकीन रखते हैं? इस बारे में एक जैसी सोच होने से फाइनेंशियल प्लानिंग आसान हो जाती है। 

    बातचीत की शुरुआत कैसे करें?

    पैसों की बात को किसी इंटरव्यू की तरह न लें। इसे एक बातचीत का हिस्सा बनाएं। आप किसी फिल्म या किसी दोस्त के अनुभव का उदाहरण देकर बात छेड़ सकते हैं। याद रखें, इसका मकसद एक-दूसरे को जज करना नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समझना है।


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