680 फीट लंबी इमारत और मक्का की मिट्टी से बनी नींव, पढ़ें मुर्शिदाबाद के 'निजामत इमामबाड़ा' की खासियत
पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद जिले में स्थित निजामत इमामबारा ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से काफी महत्व रखता है। ...और पढ़ें
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मुर्शीदाबाद का निजामत इमामबारा का दिलचस्प इतिहास (Picture Courtesy: Instagram)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल का ऐतिहासिक शहर मुर्शिदाबाद अपनी नवाबी संस्कृति और शानदार इमारतों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इसी शहर की गोद में स्थित है निजामत इमामबाड़ा, जो न केवल अपनी विशालता के लिए जाना जाता है, बल्कि भारतीय इतिहास की एक अहम कड़ी भी है।
भागीरथी नदी के तट पर स्थित यह भव्य इमारत वास्तुकला प्रेमियों और इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं है। आइए जानें इस इमामबाड़ा का इतिहास और खासियत।
विनाश की राख से हुआ भव्य निर्माण
निजामत इमामबाड़ा का इतिहास जितना गौरवशाली है, उतना ही दिलचस्प भी। असल में, इसी जगह पर पहले एक पुराना इमामबाड़ा हुआ करता था, जिसका निर्माण नवाब सिराज-उद-दौला ने करवाया था। उस समय वह इमारत मुख्य रूप से लकड़ी से बनी थी, जो एक आग की घटना में नष्ट हो गई थी।
इसके बाद, साल 1847 में नवाब नाजिम मंसूर अली खान ने अपने करीबियों की देखरेख में नए और वर्तमान इमामबाड़े का निर्माण शुरू करवाया। पुराने इमामबाड़े की नींव खुद सिराज-उद-दौला ने ईंट और गारे से रखी थी, जिसे ध्यान में रखते हुए नए निर्माण में भी इस बात का पूरा ख्याल रखा गया।

(Picture Courtesy: wbtourism.gov)
मक्का की मिट्टी से जुड़ी है इसकी नींव
इस इमारत की सबसे खास और आध्यात्मिक बात इसकी नींव से जुड़ी है। वर्तमान इमामबाड़े के निर्माण के समय जमीन को लगभग 6 फीट की गहराई तक खोदा गया था। इस गड्ढे को साधारण मिट्टी के बजाय मक्का से लाई गई मिट्टी से भरा गया था। यही कारण है कि शिया मुस्लिम समुदाय के लिए यह इमामबाड़ा न केवल एक स्मारक है, बल्कि गहरी आस्था का केंद्र भी है।
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(Picture Courtesy: Instagram)
वास्तुकला का बेजोड़ नमूना
निजामत इमामबाड़ा अपनी बनावट में मुगल शैली और कोलोनियल प्रभाव का एक सुंदर मिश्रण पेश करता है। लगभग 680 फीट लंबी यह विशाल इमारत तीन प्रमुख हिस्सों में बंटी हुई है-
- केंद्रीय प्रार्थना हॉल- यह भवन का मुख्य आकर्षण है जहां धार्मिक सभाएं होती हैं।
- विशाल विंग्स- मुख्य हॉल के दोनों ओर दो बड़े हिस्से बने हुए हैं जो इसकी भव्यता को संतुलित करते हैं।
- मेहराब और गुंबद- ऊंची कंगूरेदार मेहराबें, लंबे गलियारे और ऊंचा केंद्रीय गुंबद इसे दूर से ही एक राजसी रूप देते हैं।
हजरदुआरी पैलेस के सामने स्थित आकर्षण
यह इमामबाड़ा ठीक मशहूर हजरदुआरी पैलेस के सामने स्थित है। नदी का किनारा, सामने आलीशान महल और बीच में यह विशाल इमामबाड़ा, यह पूरा दृश्य पर्यटकों को नवाबों के समय की झलक पेश करता है। अपनी बेमिसाल सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के कारण यह आज भी मुर्शिदाबाद की सबसे अहम धरोहरों में से एक बना हुआ है।

(Picture Courtesy: wbtourism.gov)