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    आंध्र प्रदेश का 'मिनी स्विट्जरलैंड', जिसे देखने दुनिया भर से आते हैं सैलानी; एक बार जरूर करें विजिट

    Updated: Thu, 02 Apr 2026 06:00 AM (IST)

    आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम जिले में पूर्वी घाट की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच एक बेहद खूबसूरत और शांत जगह है- अराकू घाटी। ...और पढ़ें

    बादलों और पहाड़ों के बीच बसा एक छिपा हुआ स्वर्ग (Image Source: AI-Generated)

    बादलों और पहाड़ों के बीच बसा एक छिपा हुआ स्वर्ग (Image Source: AI-Generated) 

    HighLights

    1. समुद्र तल से 900-1400 मीटर ऊंचाई पर स्थित घाटी

    2. 10 लाख साल पुरानी बोरा गुफाएं प्रमुख आकर्षण हैं

    3. आदिवासी संस्कृति, बौद्ध इतिहास और प्रसिद्ध ऑर्गेनिक कॉफी

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। समुद्र तल से लगभग 900 से 1400 मीटर की ऊंचाई पर बसी अराकू घाटी अपने घने जंगलों, मनमोहक झरनों, और ठंडे मौसम के लिए जानी जाती है। साफ-सुथरा वातावरण और चारों ओर फैली हरियाली इसे एक परफेक्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाते हैं, लेकिन अराकू सिर्फ अपनी सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपने गहरे इतिहास के लिए भी मशहूर है। आइए, डिटेल में जानते हैं इसके बारे में।

    Araku Valley

    (Image Source: AI-Generated) 

    खूबसूरत घाटियों और अंधेरी सुरंगों से गुजरती है ट्रेन

    क्या आप जानते हैं कि अराकू घाटी तक पहुंचने का सफर भी मंजिल जितना ही सुहाना है? विशाखापट्टनम से अराकू तक की रेल यात्रा को भारत की सबसे खूबसूरत रेल यात्राओं में से एक माना जाता है। जब यह ट्रेन ऊंचे पहाड़ों, गहरी घाटियों और घुप्प अंधेरी सुरंगों से होकर गुजरती है, तो यह सफर पर्यटकों के लिए जीवन भर का एक यादगार अनुभव बन जाता है।

    10 लाख साल पुरानी 'बोरा गुफाएं'

    प्रकृति के नजारों के अलावा, अराकू घाटी में लगभग 10 लाख साल पुरानी बोरा गुफाएं भी मौजूद हैं। इन गुफाओं के अंदर प्राकृतिक रूप से बनी चट्टानें और आकृतियां हैं, जिन्हें विज्ञान की भाषा में स्टैलेक्टाइट और स्टैलेग्माइट कहा जाता है। भूगर्भ विज्ञान के नजरिए से ये गुफाएं बहुत ही खास और महत्वपूर्ण हैं।

    trip to Araku Valley

    (Image Source: AI-Generated) 

    प्राचीन आदिवासी जीवन और प्रकृति से जुड़ाव

    अराकू घाटी का इतिहास बहुत पुराना है। यह जगह हजारों सालों से गोंड, कोंडदोर, बगता, वाल्मीकि और खोंड जैसी प्राचीन आदिवासी जनजातियों का घर रही है। इन आदिवासियों का जीवन पूरी तरह से प्रकृति, खेती और जंगलों के संसाधनों पर निर्भर रहा है। पुराने समय में, पूर्वी घाट के ये पहाड़ी रास्ते व्यापार और संस्कृति के आदान-प्रदान के लिए बहुत महत्वपूर्ण माने जाते थे, जिन्होंने मानव सभ्यता के विकास में एक बड़ा रोल निभाया है।

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    बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव

    इस इलाके का सिर्फ आदिवासी इतिहास ही नहीं, बल्कि बौद्ध धर्म से भी गहरा नाता रहा है। अराकू के पास विशाखापट्टनम में थोटलाकोंडा और बाविकोंडा जैसे प्राचीन बौद्ध विहारों के अवशेष मिले हैं। ये अवशेष लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के माने जाते हैं। समुद्र के पास होने की वजह से यह माना जाता है कि यह क्षेत्र समुद्री व्यापार और बौद्ध धर्म को फैलाने का एक बड़ा केंद्र रहा होगा, जहां बौद्ध भिक्षु रहकर पढ़ाई करते थे।

    संस्कृति की झलक देता है ट्राइबल म्यूजियम

    आज भी अराकू की स्थानीय जनजातियों ने अपनी पुरानी जीवनशैली, लोकगीत, लोकनृत्य और रीति-रिवाजों को पूरी तरह से जिंदा रखा है। उनके त्योहारों, कला और खान-पान में प्रकृति के प्रति उनका गहरा सम्मान साफ झलकता है। पर्यटकों को इस शानदार आदिवासी संस्कृति से रूबरू कराने के लिए यहां 'अराकू ट्राइबल म्यूजियम' बनाया गया है। इस म्यूजियम में जाकर आप आदिवासियों के औजारों, उनके कपड़ों और उनकी परंपराओं को बहुत करीब से देख और समझ सकते हैं।

    देशभर में मशहूर है यहां की कॉफी

    आज अराकू घाटी दुनिया भर के सैलानियों के लिए इतिहास और प्रकृति को करीब से देखने का एक प्रमुख केंद्र बन चुकी है। इसके अलावा, यहां उगाई जाने वाली ऑर्गेनिक कॉफी पूरे भारत में मशहूर है। बता दें, यह स्वादिष्ट कॉफी यहां की पहचान होने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा भी है।

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