दिल्ली का वो ऐतिहासिक किला, जहां 'जिन्नों' को खत लिखकर मांगी जाती है मुराद; वास्तुकला का है शानदार नमूना
फिरोज शाह कोटला दिल्ली का पांचवां शहर फिरोजाबाद का मुख्य गढ़ था, जिसे 14वीं शताब्दी में सुल्तान फिरोज शाह तुगलक ने बनवाया था। ...और पढ़ें

क्या सच में फिरोज शाह कोटला में रहते हैं जिन्न? (Image Source: Incredible India)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं कि दिल्ली का पांचवां शहर कौन-सा था? 14वीं शताब्दी में जब पुरानी दिल्ली में पानी का भारी संकट पैदा हो गया, तब सुल्तान फिरोज शाह तुगलक ने एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने पुरानी राजधानियों को पीछे छोड़ते हुए यमुना नदी के किनारे एक बिल्कुल नया शहर बसाया-'फिरोजाबाद'।
इसी शहर की धड़कन और मुख्य गढ़ था 'कोटला फिरोज शाह', जिसे आज हम फिरोज शाह कोटला के नाम से जानते हैं। बता दें, यह दिल्ली की सबसे पुरानी और दिलचस्प इमारतों में से एक है। आइए, इस ऐतिहासिक किले के कुछ अनसुने किस्सों के बारे में जानते हैं।

(Image Source: Incredible India)
मुगलों को भी भा गया था इसका अनूठा डिजाइन
सुल्तान फिरोज शाह हमेशा अपनी जनता की भलाई और संरक्षण के बारे में सोचते थे। उनके राज में कई सरायों, पुलों, महलों और कस्बों का निर्माण हुआ। 'कुश्क-ए-फिरोज' के नाम से मशहूर यह किला वास्तुकला की एक शानदार मिसाल है।
मलबे से बनी मजबूत दीवारों वाले इस बहुभुज आकार के किले को पहली बार अलग-अलग काम के हिसाब से विशेष हिस्सों में बांटा गया था। यह इंजीनियरिंग इतनी शानदार थी कि बाद में ताकतवर मुगलों ने भी किले बनाने के इसी तरीके को अपनाया। किले का पूर्वी हिस्सा सीधे यमुना नदी की ओर खुलता था। किले के विशाल बुर्जों वाले भव्य मुख्य दरवाजे से इसकी तत्कालीन सुरक्षा और भव्यता का साफ अंदाजा लगाया जा सकता है।
खबरें और भी
हरियाणा से लाया गया चमचमाता 'अशोक स्तंभ'
किले के बीचों-बीच आपको उत्तर और दक्षिण हिस्से के कई ऐतिहासिक खंडहर देखने को मिलेंगे। यहीं पर शान से खड़ा है बलुआ पत्थर से बना 'टोपरा अशोक स्तंभ'। यह प्राचीन धरोहर असल में सम्राट अशोक ने बनवाई थी, जिसे हरियाणा के टोपरा कलां से यहां लाया गया था।
इस स्तंभ पर संस्कृत, पाली, प्राकृत और ब्राह्मी लिपि में कई ऐतिहासिक संदेश खुदे हैं। आज भी जब दोपहर की सुनहरी धूप इस पर पड़ती है, तो यह चमक उठता है और देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देता है। इसके अलावा, किले के शांत और विशाल बगीचे यहां आने वालों को इतिहास के साथ-साथ प्रकृति का भी खूबसूरत अहसास कराते हैं।

(Image Source: Incredible India)
तैमूर को दीवाना बनाने वाली मस्जिद और गोल बावड़ी
स्तंभ के ठीक बगल में तुगलक वंश की वास्तुकला का एक नायाब खजाना मौजूद है- 'जामा मस्जिद'। यह उस दौर की सबसे बड़ी और पुरानी इमारतों में से एक है, जहां आज भी इबादत की जाती है। 1398 ईस्वी में जब शासक तैमूर यहां आया, तो वह इस मस्जिद की खूबसूरती देखकर इतना हैरान हुआ कि उसने अपने साम्राज्य में लौटकर बिल्कुल इसी डिजाइन से प्रेरित एक और मस्जिद बनवाई।
वहीं, स्तंभ के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में वास्तुकला का एक और अजूबा छिपा है। यहां एक गोल बावड़ी है, जिसने उस दौर में पानी की जरूरत को पूरा किया था। पूरी दिल्ली में यह इकलौती ऐसी बावड़ी है जिसका डिजाइन गोल है और इसमें कुआं और टैंक एक ही में जुड़े हुए हैं।

(Image Source: Incredible India)
क्या सच में यहां जिन्न रहते हैं?
इतिहास के पन्नों से अलग, यह जगह अपने एक अनोखे रहस्य के लिए भी जानी जाती है। लोककथाओं और स्थानीय लोगों के विश्वास के अनुसार, इस किले में 'जिन्नों' का बसेरा है।
जिन लोगों का पारलौकिक शक्तियों पर यकीन है, वे यहां अपनी परेशानियों की चिट्ठियां छोड़कर जाते हैं। लोग मानते हैं कि जिन्न उनकी अर्जियां पढ़कर उनकी समस्याओं का हल निकालेंगे और उन्हें अपना आशीर्वाद देंगे। कुछ लोग तो यहां बुरी आत्माओं के साये से बचने और झाड़-फूंक के लिए भी आते हैं। भले ही यह बात अजीब लगे, लेकिन यहां आने वाले कई लोग इस चमत्कार पर पूरा भरोसा करते हैं।

(Image Source: Incredible India)
किले के आस-पास का रोमांच
फिरोज शाह कोटला के बाहर भी एक पूरी दुनिया आपका इंतजार कर रही है। जी हां, यहां से कुछ ही दूरी पर मुगल वास्तुकला की मिसाल और यूनेस्को विश्व धरोहर 'लाल किला' मौजूद है, जो हर पर्यटक की पहली पसंद है।
अगर आपको खरीदारी और स्ट्रीट फूड का शौक है, तो पास ही स्थित चांदनी चौक का रंग-बिरंगा और ऐतिहासिक बाजार आपका दिन बना देगा। वहीं, अगर आप मुगलों के आने से पहले के दिल्ली के इतिहास को खंगालना चाहते हैं, तो 'पुराना किला' जरूर जाएं, जो अपने आप में अनगिनत कहानियां समेटे हुए है।