ट्रेन में जब मन चाहे चादर तानकर सो सकते हैं क्या? जुर्माने से बचना है, तो जान लें रेलवे के नियम
भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए सोने के नियम तय किए हैं, जिसके तहत रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ही सोने की अनुमति है।

ट्रेन में कब सो सकते हैं और कब बैठना मजबूरी? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। "थोड़ा खिसकिए साहब!" या "दिन में मिडिल बर्थ कौन खोलकर सोता है यार!" जैसी तीखी बहसें... ट्रेन का खूबसूरत सफर बर्बाद कर देती हैं। जी हां, भारतीय रेल में सफर करने वाला शायद ही कोई ऐसा मुसाफिर हो, जिसका सामना इस तरह की किचकिच से न हुआ हो। यह जर्नी जितनी मजेदार हो सकती है, सीटों को लेकर होने वाली यह आपसी रार पूरे सफर का मजा उतना ही किरकिरा कर देती है। कभी दोपहर में भी खुली रहने वाली मिडिल बर्थ, तो कभी सिर पर मंडराता अपर बर्थ का भारी-भरकम सूटकेस- हर बार सब्र का इम्तिहान लेते हैं।
अच्छी बात यह है कि इस रोज-रोज के ड्रामे पर लगाम कसने के लिए भारतीय रेलवे के पास बिल्कुल साफ नियम मौजूद हैं। अगर आप भी अगली बार बिना किसी चिक-चिक के सुकून भरी यात्रा का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो रेलवे के इन 'स्लीपिंग रूल्स' को जानना आपके लिए बेहद जरूरी है।
ट्रेन में मनमर्जी से नहीं सो सकते आप
भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सहूलियत और शांति के लिए सोने का एक फिक्स टाइम तय किया हुआ है। नियमों के मुताबिक, ट्रेन में सोने का आधिकारिक समय रात 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक ही है। यह नियम मुख्य रूप से नीचे वाली और बीच वाली बर्थ पर लागू होता है। इसका सीधा मतलब यह है कि दिन के समय आपको नीचे वाली सीट सफर कर रहे बाकी यात्रियों के साथ बैठने के लिए शेयर करनी होगी।
अपर बर्थ के लिए क्या हैं नियम?
अगर आपके पास अपर बर्थ का टिकट है, तो आपके लिए नियम काफी आरामदायक हैं:
- दिन में भी नींद पूरी करने की आजादी: सबसे ऊपर वाली सीट के यात्रियों पर केवल रात में सोने की कोई पाबंदी नहीं है। अगर आपका मन करे, तो आप दिन के उजाले में भी अपनी सीट पर जाकर मजे से आराम कर सकते हैं।
- रात 10 बजे के बाद अपनी सीट पर जाना होगा: अगर आप दिन के वक्त नीचे वाली सीट पर बैठकर सफर का मजा ले रहे हैं, तो ध्यान रखें कि रात 10 बजते ही आपको अपनी ऊपर वाली सीट पर वापस जाना होगा। इसके बाद आप नीचे वाली सीट पर न तो बैठ सकते हैं और न ही लेट सकते हैं।
- ऊपर भारी सामान ले जाने की मनाही: कई लोग अपना भारी सूटकेस लेकर ऊपर वाली सीट पर सो जाते हैं। रेलवे के मुताबिक यह बेहद खतरनाक हो सकता है। अचानक ब्रेक लगने पर या झटके से भारी सामान गिर सकता है, जिससे नीचे बैठे लोगों को चोट लग सकती है। इसलिए, ऊपर जाते वक्त सिर्फ अपना छोटा या हल्का सामान ही साथ ले जाएं।
- सहयात्रियों का भी रखें ध्यान: भले ही ऊपर की सीट पूरी तरह आपकी है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि आप बाकी लोगों को परेशान करें। सभी नियमों का पालन करना आपकी भी जिम्मेदारी है।
मिडिल बर्थ से जुड़ी जरूरी बातें
बीच वाली सीट को लेकर ट्रेन में सबसे ज्यादा विवाद होता है, इसलिए रेलवे ने इसके नियम एकदम साफ रखे हैं:
- सिर्फ रात में खुलेगी सीट: मिडिल बर्थ का इस्तेमाल आप केवल रात 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक ही सोने के लिए कर सकते हैं।
- सुबह होते ही सीट बंद करना जरूरी: सुबह 6 बजते ही इस बर्थ को वापस नीचे की तरफ फोल्ड कर देना चाहिए। ऐसा करना इसलिए जरूरी है ताकि नीचे वाली बर्थ पर बैठे सभी लोग आराम से और सीधे होकर बैठ सकें।
कोई नियम न माने तो क्या करें?
अगर कोई यात्री दिन के समय भी अपनी बीच वाली सीट खोले रखता है, तो आप उसे शांति से रेलवे के नियम बताकर सीट मोड़ने का आग्रह कर सकते हैं। अगर बात फिर भी न बने और वह आपको परेशान करे, तो आप टीटीई से तुरंत उसकी शिकायत कर सकते हैं या रेलवे के आधिकारिक पोर्टल पर भी अपनी बात रख सकते हैं।
