11वीं सदी का वो अभेद्य किला, जहां आज भी गूंजती है शौर्य की गाथा; पढ़ें जबलपुर के मदन महल की कहानी
जबलपुर का मदन महल किला, 11वीं सदी में राजा मदन सिंह द्वारा निर्मित, गोंडवाना साम्राज्य की शक्ति और रानी दुर्गावती के शौर्य का प्रतीक है। ...और पढ़ें
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जबलपुर का मदन महल किला (Picture Credit- AI Generated))
HighLights
11वीं सदी में राजा मदन सिंह ने बनवाया
रानी दुर्गावती के अदम्य साहस का प्रतीक
युद्ध कक्ष, मनोरंजन कक्ष, अश्वशाला मौजूद
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हिन्दुस्तान का दिल मध्य प्रदेश की हर बात निराली है। यहां धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ सदियों पुरानी शौर्य गाथाएं भी सुनने को मिलती है। यह जगह घूमने के शौकीनों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। अगर आप खूबसूरत नजारों के साथ-साथ इतिहास को करीब से देखना चाहते हैं, तो संस्कारधानी जबलपुर में आपकी यह तलाश पूरी हो सकती है।
आज हम आपको बताएंगे मध्य प्रदेश का दिल कहे जाने वाले जबलपुर की ऊंची पहाड़ियों पर आज भी शान से खड़े 'मदन महल किले' की। यह किला सिर्फ ईंट और पत्थरों से बना कोई पुराना ढांचा नहीं है, बल्कि गोंडवाना साम्राज्य की बेशुमार ताकत, शाही वैभव और वीरांगना रानी दुर्गावती के असीम साहस का एक जीता-जागता सबूत है।
गौरवशाली इतिहास का सबूत
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(Picture Credit- Instagram)
शहर के शोर-शराबे से दूर, यह किला एक शांत पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में गोंड वंश के प्रतापी शासक राजा मदन सिंह ने करवाया था। इस किले को करीब से देखने पर समझ आता है कि उस दौर में भी राजा कितने दूरदर्शी थे। उन्होंने इतनी ऊंचाई पर इस किले को इसलिए बनाया ताकि पूरे शहर और आस-पास के इलाकों पर दुश्मनों से सुरक्षा के लिए पैनी नजर रखी जा सके।
रानी दुर्गावती के शौर्य की कहानी
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भले ही इस किले को राजा मदन सिंह ने बनवाया था, लेकिन इस किले की कहानी गोंडवाना की सबसे महान और निडर शासिका, रानी दुर्गावती के बिना अधूरी है। रानी दुर्गावती एक ऐसी वीरांगना थीं, जिन्होंने अपने राज्य और अपनी प्रजा की रक्षा के लिए अपनी आखिरी सांस तक दुश्मनों से लोहा लिया था। आज भी इस किले में रानी दुर्गावती की मौजूदगी का एहसास होता है। किले की दीवारों में उनका शौर्य गूंजता सुनाई देता है।
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आज भी मौजूद हैं किले के कक्ष
बीतते समय और सदियों के लंबे सफर के बाद, भले ही आज यह किला खंडहरों में तब्दील हो चुका है, लेकिन इसका हर एक कोना अपने आप में एक पूरा इतिहास समेटे हुए है। इस किले के अंदर घूमते हुए आपको कई ऐतिहासिक निशानियां देखने को मिलती हैं:
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- युद्ध कक्ष: जहां राजा और सेनापति अपनी गुप्त रणनीतियां बनाते थे।
- आमोद-प्रमोद कक्ष: शाही परिवार के लिए बना यह मनोरंजन कक्ष बताता है कि वे कला और संस्कृति को भी कितना महत्व देते थे।
- प्राचीन अश्वशाला और जलाशय: यहां का अस्तबल और पानी की आपूर्ति के लिए बनाया गया छोटा-सा जलाशय उस समय की उन्नत जीवन-शैली और बेमिसाल वास्तुकला की साफ झलक पेश करते हैं।
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