टर्मिनल, जंक्शन या कैंट में क्या है फर्क? जानिए ट्रेन के सफर में अक्सर कन्फ्यूज करने वाले 8 शब्दों का मतलब
क्या आपने कभी सोचा है कि किसी रेलवे स्टेशन के नाम के आगे 'टर्मिनल' तो किसी के आगे 'जंक्शन' क्यों जुड़ा होता है? ...और पढ़ें

स्टेशन और ट्रेन से जुड़े इन 8 अहम शब्दों का सही मतलब जानें (Image Source: AI-Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। खिड़की वाली सीट, चाय की चुस्कियां और बाहर भागते हुए नजारे ट्रेन के सफर को खास बना देते हैं, लेकिन क्या आपने कभी रेलवे स्टेशन के पीले बोर्ड पर लिखे शब्दों पर गौर किया है?
अक्सर हम स्टेशनों के नाम के आगे Terminal, Junction, Central या Cantt लिखा देखते हैं और सोचते हैं कि आखिर इनका मतलब क्या है। इतना ही नहीं, ट्रेन के अंदर और बाहर भी कई ऐसे शब्द इस्तेमाल होते हैं जो हमें कन्फ्यूज कर देते हैं।
आइए, आज आसान भाषा में समझते हैं रेलवे से जुड़े इन 8 जरूरी शब्दों का मतलब, ताकि अगली बार सफर करते समय आप एकदम 'रेलवे एक्सपर्ट' की तरह बात कर सकें।
टर्मिनल
टर्मिनल का सीधा सा मतलब है- रास्ते का अंत। जिस स्टेशन के आगे रेलवे ट्रैक खत्म हो जाता है और ट्रेन आगे नहीं जा सकती, उसे टर्मिनल या टर्मिनस कहते हैं। यहां से ट्रेन सिर्फ उसी दिशा में वापस लौट सकती है जहां से वह आई थी।
- उदाहरण: आनंद विहार टर्मिनल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस।
जंक्शन
अगर टर्मिनल रास्ते का अंत है, तो जंक्शन रास्तों का मिलन है। जिस स्टेशन पर कम से कम तीन अलग-अलग दिशाओं से रेलवे लाइन आकर मिलती हैं, उसे जंक्शन कहा जाता है। यानी यहां से ट्रेनें कई अलग-अलग रूट पर जा सकती हैं। भारत में सबसे ज्यादा रूट्स वाला जंक्शन मथुरा जंक्शन है, जहां से 7 अलग-अलग लाइनें निकलती हैं।
- उदाहरण: नई दिल्ली जंक्शन, पटना जंक्शन, मथुरा जंक्शन।
सेंट्रल
जब किसी एक ही शहर में कई रेलवे स्टेशन होते हैं, तो उस शहर के सबसे मुख्य, सबसे पुराने और सबसे बिजी स्टेशन को 'सेंट्रल' का नाम दिया जाता है। यहां से देश के लगभग हर कोने के लिए ट्रेनें मिल जाती हैं और यहां सुविधाओं का स्तर भी बाकी स्टेशनों से बेहतर होता है।
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- उदाहरण: कानपुर सेंट्रल, मुंबई सेंट्रल, चेन्नई सेंट्रल।
कैंट
'Cantt' असल में अंग्रेजी शब्द Cantonment यानी छावनी का छोटा रूप है। जिस स्टेशन के नाम के आगे कैंट लगा हो, समझ जाइए कि वह स्टेशन सेना के इलाके या छावनी के बहुत करीब है। सेना की आवाजाही और सामान ढुलाई के लिए भी इन स्टेशनों का काफी इस्तेमाल होता है।
उदाहरण: आगरा कैंट, अंबाला कैंट, दिल्ली छावनी।
कोच
हम अक्सर ट्रेन के पूरे डिब्बे को गलती से 'बोगी' कह देते हैं, लेकिन इसका सही नाम कोच है। ट्रेन का वह पूरा हिस्सा जिसमें यात्री बैठते या सोते हैं (जैसे स्लीपर या एसी डिब्बा), उसे तकनीकी भाषा में कोच कहा जाता है। बोगी तो असल में पहियों वाले उस ढांचे को कहते हैं जिस पर यह कोच टिका होता है।
कम्पार्टमेंट
अब बात करते हैं कम्पार्टमेंट की। एक कोच के अंदर जो छोटे-छोटे हिस्से बंटे होते हैं, उन्हें कम्पार्टमेंट कहते हैं। जैसे स्लीपर क्लास में 8 सीटों (लोअर, मिडल, अपर और साइड वाली) का जो एक सेट या केबिन होता है, वह एक कम्पार्टमेंट कहलाता है।
लोको शेड
'लोको' यानी लोकोमोटिव, जिसे आम बोलचाल में ट्रेन का इंजन कहते हैं। लोको शेड रेलवे का वह खास गैराज है, जहां ट्रेन के इंजनों की मरम्मत, सर्विसिंग और देखभाल की जाती है। सफर के बाद इंजन को रिपेयरिंग के लिए यहीं भेजा जाता है।
कोच डिपो
जैसे इंजन लोको शेड में जाता है, वैसे ही यात्रियों वाले डिब्बे अपना सफर पूरा करने के बाद कोच डिपो में जाते हैं। यहां पूरे कोच की अंदर और बाहर से साफ-सफाई की जाती है, पानी भरा जाता है और यह चेक किया जाता है कि लाइट, पंखे या चार्जिंग पॉइंट ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं।