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    किचन भारत में और बेडरूम म्यांमार में, हैरान कर देगी नागालैंड के इस अनोखे गांव की दिलचस्प कहानी

    Updated: Sun, 07 Jun 2026 04:00 PM (IST)

    नागालैंड के लोंगवा गांव में एक ऐसा घर है, जो आधा भारत में है और आधा म्यांमार में। यह इस गांव के राजा का घर है, जो खाते भारत में हैं और सोते म्यांमार म ...और पढ़ें

    दो देशों की सीमा के बीच है यह घर (Picture Courtesy: Facebook)

    दो देशों की सीमा के बीच है यह घर (Picture Courtesy: Facebook)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या किसी ऐसी जगह के बारे में सोच सकते हैं, जहां आप खाना एक देश में खाएं और सोने के लिए दूसरे देश चले जाएं? सुनने में यह काल्पनिक कहानी लगता है, लेकिन हमारे नॉर्थ-ईस्ट में एक ऐसा गांव सचमुच मौजूद है। 

    नागालैंड की राजधानी कोहिमा से लगभग 389 किलोमीटर दूर मोन जिले में एक ऐसा गांव बसा है, जो आपको हैरान कर देगा। इस गांव का नाम है लोंगवा। यह गांव भारत की पूर्वी सीमा पर स्थित है और अपनी अनोखी भौगोलिक स्थिति के लिए मशहूर है। दरअसल, यहां एक ऐसा घर है, जो आधा भारत में है और आधा म्यांमार में। आइए जानें इस हैरान करने वाले गांव से जुड़ी दिलचस्प बातें। 

    आधा भारत और आधा म्यांमार में है घर

    लोंगवा मोन जिले के सबसे बड़े गांवों में से एक है। इस गांव की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां के राजा, जिन्हें अंग कहा जाता है, का घर ठीक भारत और म्यांमार की सीमा पर बना हुआ है। भारत और म्यांमार की सीमा इनके घर के ठीक बीच से होकर गुजरता है। यही वजह है कि राजा और उनका परिवार खाना भारत में खाते हैं और सोने के लिए म्यांमार वाले हिस्से का इस्तेमाल करते हैं। 

    Longwa Village (2)

    (Picture Courtesy: Facebook)

    दोनों देशों के गांवों पर राज

    लोंगवा समेत कई गांव यहां के राजा के अधीन आते हैं। इनमें से कुछ गांव म्यांमार में हैं, तो कुछ नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में फैले हुए हैं। भले ही यह गांव दो देशों में बंटा है, लेकिन पूरे गांव पर राज सिर्फ एक ही राजा का चलता है। 

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    बिना वीजा-पासपोर्ट के घूमते हैं लोग

    भारत और म्यांमार की सीमा पर होने की वजह से यहां के ग्रामीणों को तकनीकी रूप से दोनों देशों की दोहरी नागरिकता मिली हुई है। इसका फायदा यह है कि यहां के लोगों को म्यांमार जाने के लिए न तो किसी वीजा की जरूरत होती है और न ही भारतीय पासपोर्ट की। वे दोनों देशों में पूरी आजादी से घूम-फिर सकते हैं।

    चार नदियों से घिरी प्राकृतिक सुंदरता

    यह गांव जितना अनोखा है, उतना ही खूबसूरत भी है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता देखने लायक है। इस पूरे गांव से होकर कुल चार नदियां बहती हैं, जिसमें से दो नदियां भारत के हिस्से में हैं और दो नदियां म्यांमार के हिस्से में बहती हैं।

    कभी कहलाते थे हेड हंटर्स

    इस गांव में रहने वाली कोन्याक जनजाति के लोगों को पहले हेड हंटर्स के नाम से जाना जाता था। पुराने समय में इस ट्राइब के लोग इंसानों को मारकर उनका सिर अपने साथ ले जाते थे। हालांकि, साल 1960 के दशक के बाद से यहां हेड हंटिंग की यह प्रथा पूरी तरह से बंद हो चुकी है।

    Longwa Village

    (Picture Courtesy: Facebook)

    कैसे पहुंचें मोन जिला?

    अगर आप इस अनोखे गांव की यात्रा करना चाहते हैं, तो आपको पहले मोन जिला मुख्यालय पहुंचना होगा। 

    • हवाई मार्ग- सबसे नजदीकी एयरपोर्ट असम का जोरहाट है, जो मोन से लगभग 161 किलोमीटर दूर है। वहां से सीधे मोन के लिए बस नहीं है, इसलिए आपको पहले सोनारी या सिमुलगुरी पहुंचना होगा और फिर वहां से मोन के लिए आगे बढ़ना होगा।
    • रेल मार्ग- मोन के लिए कोई सीधी ट्रेन सेवा नहीं है। आप असम के भोजू रेलवे स्टेशन तक आ सकते हैं और वहां से 7 किमी दूर सोनारी पहुंचकर मोन जा सकते हैं। दूसरा विकल्प सिमुलगुरी रेलवे स्टेशन है, जहां से आपको पहले नगिनीमोरा जाना होगा और फिर वहां से मोन जा सकते हैं।
    • सड़क मार्ग- असम के शिवसागर जिले के सोनारी के रास्ते बस से मोन पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा सिमुलगुरी के रास्ते भी आ सकते हैं, लेकिन सीधी बस न होने के कारण पहले नगिनीमोरा आना होगा और फिर वहां से मोन जिला मुख्यालय के लिए बस लेनी होगी।

     
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