बेल्जियम में आज भी चालू है 100 साल पुराना लकड़ी का एस्केलेटर, सजावट के लिए हुआ है पीतल का इस्तेमाल
क्या आपने कभी लकड़ी का एस्केलेटर देखा है? शायद नहीं, क्योंकि आजकल हर जगह स्टील की आधुनिक मशीनें ही नजर आती हैं, लेकिन बेल्जियम में इतिहास का एक ऐसा पन ...और पढ़ें

आज भी चालू हालत में है बेल्जियम का 100 साल पुराना वुडन एस्केलेटर (Image Source: Instagram)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जरा सोचिए, आज के इस आधुनिक दौर में जहां हर तरफ स्टील की मशीनें हैं, वहां अगर आपको लकड़ी से बने एस्केलेटर पर चढ़ने का मौका मिले, तो कैसा लगेगा? यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि बेल्जियम की हकीकत है। यहां एक ऐसी ऐतिहासिक सुरंग है जहां लगा एस्केलेटर 100 साल पुराना होने के बावजूद आज भी पूरी रफ्तार और शान के साथ काम कर रहा है। यह दुनिया के सबसे पुराने एस्केलेटर्स में से एक है, जो आपको 1933 के दौर की याद दिलाता है।

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दुनिया के सबसे पुराने एस्केलेटर्स में से एक
यह अनोखा एस्केलेटर बेल्जियम की 'सिंट-आन्ना टनल' में स्थित है। यह टनल शेल्ड्र नदी के नीचे बनी हुई है और शहर के बाएं व दाएं किनारों को आपस में जोड़ने का काम करती है। यह दुनिया के सबसे पुराने एस्केलेटरों में से एक है। इसे साल 1933 में आम जनता के लिए शुरू किया गया था और तब से लेकर आज तक यह लोगों की सेवा में है।
लकड़ी और पीतल की शानदार कारीगरी
इस एस्केलेटर की बनावट बेहद खास है। इसकी सीढ़ियां लकड़ी की बनी हैं और सजावट के लिए पीतल का खूबसूरती से इस्तेमाल किया गया है। पैदल यात्रियों के साथ-साथ साइकिल चालक भी नदी के नीचे आने-जाने के लिए इसका उपयोग करते हैं।
हैरानी की बात यह है कि लगभग 100 साल पुराने होने के बावजूद इसे कभी बदला नहीं गया। इसकी नियमित देखभाल और रखरखाव किया जाता है, जिससे यह आज भी अपनी मूल अवस्था में है। इसके साथ ही, यहां 'आर्ट डेको' शैली की मेटल की लिफ्ट्स भी लगी हैं, जो अपनी पुरानी और असली हालत में आज भी सुचारू रूप से कार्य कर रही हैं। यह पूरी जगह औद्योगिक विरासत का एक जीता-जागता उदाहरण है।
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न्यूयॉर्क में भी है ऐसा ही अजूबा
सिर्फ बेल्जियम ही नहीं, बल्कि न्यूयॉर्क में भी लकड़ी के एस्केलेटर का इतिहास मौजूद है। न्यूयॉर्क के 'मैकेस हेराल्ड स्क्वायर' में 1900 के शुरुआती वर्षों की झलक मिलती है। यहां लगा लकड़ी का एस्केलेटर लगभग 1920 के आसपास स्थापित किया गया था। ठोस 'ओक' की लकड़ी से बना यह एस्केलेटर आज भी नियमित रूप से इस्तेमाल होता है। अपने पारंपरिक डिजाइन और ऐतिहासिक महत्व के कारण इसे भी एक अनोखी विरासत माना जाता है।