Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    रात 10 से सुबह 6 बजे तक ट्रेन में मना होते हैं ये 5 काम, बिना जानकारी मुश्किल हो सकता है आपका सफर

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 03:50 PM (IST)

    यात्रियों को सफर के दौरान किसी परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए भारतीय रेलवे में रात 10 से सुबह 6 बजे तक कुछ 'नाइट जर्नी रूल्स' लागू रहते हैं। ...और पढ़ें

    रात 10 बजे के बाद ट्रेन में बदल जाते हैं कई नियम, जानेंगे तो सफर में नहीं होगी कोई परेशानी (Image Source: AI-Generated)

    रात 10 बजे के बाद ट्रेन में बदल जाते हैं कई नियम, जानेंगे तो सफर में नहीं होगी कोई परेशानी (Image Source: AI-Generated)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय रेलवे से हर दिन लाखों यात्री अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं। लंबी दूरी की ट्रेनों में रात बिताना एक आम बात है, लेकिन जरा सोचिए, आप दिनभर की थकान के बाद गहरी नींद में हों और कोई पास वाली सीट पर बैठकर तेज आवाज में गाने सुनने लगे या फोन पर चिल्लाकर बात करने लगे?

    दरअसल, ऐसी ही परेशानियों से यात्रियों को बचाने के लिए रेलवे ने रात 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक के लिए खास 'नाइट जर्नी रूल्स' लागू किए हुए हैं। हर ट्रेन यात्री को इन नियमों की जानकारी होनी ही चाहिए। आइए जानते हैं।

     

    शोर-शराबा करने की बिल्कुल इजाजत नहीं

    रात 10 बजते ही ट्रेन में शांति का माहौल बनाए रखना सबसे पहला नियम है। इस दौरान आप न तो मोबाइल पर जोर-जोर से बात कर सकते हैं और न ही बिना इयरफोन लगाए स्पीकर पर वीडियो या म्यूजिक चला सकते हैं। दोस्तों के साथ ग्रुप में तेज आवाज में हंसी-मजाक करने पर भी पाबंदी है, जिससे किसी दूसरे यात्री की नींद खराब न हो।

    मेन लाइट बंद करना है जरूरी

    कई बार ऐसा होता है कि कोई एक यात्री देर रात तक किताब पढ़ना चाहता है और इसके लिए वह पूरे केबिन की बड़ी लाइट जलाकर रखता है। इससे अन्य यात्रियों को सोने में दिक्कत होती है। रेलवे के नियम के अनुसार, रात 10 बजे के बाद कोच की सभी मेन लाइटें बुझा देनी चाहिए। रात के समय सिर्फ 'नाइट बल्ब' ही जल सकता है। अगर किसी को पढ़ना ही है, तो वह अपनी सीट की पर्सनल रीडिंग लाइट का इस्तेमाल कर सकता है।

    खबरें और भी

    मिडिल बर्थ के लिए रेलवे का क्या है नियम?

    लोअर और मिडिल बर्थ वाले यात्रियों के बीच सीट को लेकर होने वाली बहस को खत्म करने के लिए रेलवे का एक साफ नियम है। मिडिल बर्थ वाला यात्री अपनी सीट को केवल रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच ही खोलकर सो सकता है। सुबह 6 बजे के बाद उसे अपनी मिडिल बर्थ को नीचे करना ही होगा, ताकि बाकी लोग लोअर बर्थ पर आराम से बैठ सकें। इसी तरह, रात 10 बजे के बाद लोअर बर्थ वाले यात्री को भी सोने की जगह देनी होगी, वह किसी को अपने साथ बैठने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

    टिकट चेकिंग के लिए रात में नहीं जगा सकता स्टाफ

    यात्रियों की अच्छी नींद का ख्याल रखते हुए रेलवे ने अपने टिकट चेकिंग स्टाफ को भी निर्देश दिए हुए हैं। बता दें, कोई भी टीटीई रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच आपका टिकट चेक करने के लिए आपको नींद से नहीं उठा सकता। उन्हें अपना काम रात 10 बजे से पहले खत्म करना होता है। हालांकि, जो यात्री रात 10 बजे के बाद ही ट्रेन में चढ़े हैं, उनका टिकट इस दौरान चेक किया जा सकता है।

    इसके अलावा, रात 10 बजे के बाद हॉकर या वेंडर भी ट्रेन में जोर-जोर से चिल्लाकर कोई सामान नहीं बेच सकते, लेकिन अगर किसी यात्री ने पहले से ई-केटरिंग के जरिए खाना बुक किया हुआ है, तो उसकी डिलीवरी सीट पर जरूर की जाएगी।

    कोई नियम तोड़े, तो तुरंत करें शिकायत

    अगर कोई पैसेंजर रात 10 बजे के बाद इन नियमों की अनदेखी करता है, तो आपको उससे बहस करने की जरूरत नहीं है। आप तुरंत ट्रेन में मौजूद आरपीएफ, टीटीई या कोच अटेंडेंट से शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा, रेलवे के आधिकारिक ऐप 'RailMadad' या हेल्पलाइन नंबर 139 का इस्तेमाल करके भी मदद मांगी जा सकती है। नियम का पालन न करने वालों पर रेलवे जुर्माना भी लगा सकता है।

    यह भी पढ़ें- लोअर बर्थ नहीं मिली तो क्या TTE बदलवा सकता है सीट? समझिए रेलवे किस आधार पर करता है अलॉटमेंट

    यह भी पढ़ें- जब सुविधाएं एक जैसी, फिर 3AC से कम क्यों होता है थर्ड एसी इकोनॉमी का किराया? 90% लोग नहीं जानते होंगे वजह