Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    जब सुविधाएं एक जैसी, फिर 3AC से कम क्यों होता है थर्ड एसी इकोनॉमी का किराया? 90% लोग नहीं जानते होंगे वजह

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 05:34 PM (IST)

    भारतीय रेलवे में 3AC और 3AC इकोनॉमी कोच की सुविधाओं में समानता के बावजूद किराए में अंतर क्यों देखने को मिलता है? इसका जवाब कई लोग नहीं जानते हैं। ...और पढ़ें

    क्या 3AC इकोनॉमी में सफर करना 3AC जितना आरामदायक है? (Image Source: AI-Generated)

    क्या 3AC इकोनॉमी में सफर करना 3AC जितना आरामदायक है? (Image Source: AI-Generated) 

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय रेलवे से सफर करने वाले यात्रियों के मन में अक्सर एक सवाल उठता है कि जब 3AC और थर्ड एसी इकोनॉमी कोच लगभग एक जैसी सुविधाएं देते हैं, तो उनके किराए में इतना अंतर क्यों होता है? अगर आप भी इस बात को लेकर उलझन में हैं, तो आइए इस आर्टिकल में इस अंतर का पूरा गणित समझते हैं।

    सुविधाएं एक जैसी, फिर भी है बड़ा फर्क

    अगर आप बाहर से देखेंगे तो 3AC और 3AC इकोनॉमी के डिब्बे आपको बिल्कुल जुड़वा लगेंगे। दोनों ही कोच में यात्रियों को वातानुकूलित सफर का अनुभव मिलता है और बेडरोल भी दिया जाता है। अपर, मिडिल, लोअर और साइड की दो सीटों से लेकर प्रति कोच चार वॉशरूम होने तक, बर्थ की बनावट में सब कुछ एक समान है। इसके बावजूद, दोनों के बीच का असली अंतर कोच के अंदर मिलने वाले 'स्पेस' में छिपा होता है।

    सीटों की चौड़ाई में की गई है कटौती

    दरअसल, किराए में कमी का सबसे बड़ा कारण सीटों का साइज है। सामान्य 3AC डिब्बे की सीट का आकार 1820×635 मिलीमीटर होता है, जबकि इकोनॉमी क्लास में यही साइज 1850×573 मिलीमीटर रखा गया है। इसका सीधा मतलब है कि इकोनॉमी कोच में सीट की चौड़ाई घटा दी गई है। यही वजह है कि इसमें लेटते समय यात्रियों को नॉर्मल 3AC जितना आराम नहीं मिल पाता।

    ज्यादा सीटें, लेकिन लेगरूम कम

    इकोनॉमी कोच में आमने-सामने की सीटों के बीच की खाली जगह काफी कम होती है। जगह इतनी कम होती है कि बैठने पर सामने वाले यात्री से आपके पैर टकरा सकते हैं। दरअसल, एक सामान्य 3AC कोच में 72 यात्रियों के सफर करने की व्यवस्था होती है, जबकि इकोनॉमी कोच में कुल 83 सीटें लगाई जाती हैं। कोच के अंदर इन एक्स्ट्रा सीटों को एडजस्ट करने के लिए ही यात्रियों के उठने-बैठने और पैरों के पास की खाली जगह को कम किया जाता है।

    खबरें और भी

    सुविधाओं नहीं, बल्कि स्पेस से हुआ है समझौता

    ज्यादा से ज्यादा सीटें फिट करने के लिए सिर्फ बर्थ के बीच की जगह ही नहीं घटाई गई है, बल्कि 3AC इकोनॉमी कोच के वॉशरूम और हाथ धोने वाले बेसिन का आकार भी सामान्य थर्ड एसी की तुलना में छोटा रखा गया है। कोच की हर खाली जगह का इस्तेमाल सीटें बढ़ाने के लिए किया गया है।

    आसान शब्दों में समझें तो, 3AC इकोनॉमी में सुविधाओं से कोई समझौता नहीं किया गया है, बल्कि 'स्पेस मैनेजमेंट' के जरिए एक ही कोच में ज्यादा यात्रियों के सफर की व्यवस्था की गई है। इसी वजह से रेलवे इकोनॉमी कोच के यात्रियों से सामान्य थर्ड एसी के मुकाबले कम किराया वसूलता है।

    यह भी पढ़ें- ट्रेन में मिडिल बर्थ खोलने का सही समय क्या है? विवाद से बचने के लिए यात्रियों को जरूर जानना चाहिए यह नियम

    यह भी पढ़ें- AC कोच में यात्रियों को क्यों मिलती हैं 2 अलग-अलग चादरें? लॉजिक जानकर आप भी करेंगे रेलवे की तारीफ