ट्रिप प्लान करते वक्त अपने पेरेंट्स जैसे लेते हैं फैसले? पढ़ें क्या है 2026 का ‘इनहेरिटूरिज्म’ ट्रेंड
कई लोगों की ट्रिप प्लान करने की आदत या पसंद उनके पेरेंट्स से मिलती-जुलती होती है, जिसे इनहेरेटूरिज्म कहते हैं। ...और पढ़ें

क्या है इनहेरेटूरिज्म? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आपको अपनी बचपन की फैमिली ट्रिप तो याद ही होगी, लेकिन क्या आप ध्यान दिया है कि आपके पेरेंट्स हमेशा एक ही किस्म का होटल बुक करते थे या उनके घूमने-फिरने का एक खास तरीका या वे किस तरह के रेस्टोरेंट्स में जाना पसंद करते थे?
अब अपने आज पर गौर कीजिए। क्या आप भी ट्रिप प्लान करते समय जाने अनजाने में ही अपने पेरेंट्स जैसे फैसले लेते हैं या उन्हीं की तरह चीजें पसंद करते हैं? अगर आप भी आज भी वहीं होटल चुनते हैं या वैसे ही एक्सपीरिएंस लेना पसंद करते हैं जैसा बचपन से अपने पेरेंट्स के साथ करते आए हैं, तो आप अकेले नहीं हैं।
दरअसल, इसे इनहेरिटूरिज्म कहा जाता है। यह इंहेरेंट और टूरिज्म शब्द को जोड़कर बना है। लेकिन यह है क्या और इसका क्या मतलब है? आइए जानें इस बारे में।
क्या है 'इनहेरिटूरिज्म'?
एक रिपोर्ट के अनुसार, इनहेरिटूरिज्म साल 2026 का एक उभरता हुआ ट्रैवल ट्रेंड है। यह शब्द इस बारे में बताता है कि कैसे मिलेनियल्स और जेन-जी अनजाने में अपने माता-पिता की ट्रैवल से जुड़ी आदतों को अपना रहे हैं। चाहे वह किसी खास होटल ब्रांड को पसंद करना हो, लॉयल्टी प्रोग्राम से जुड़े रहना हो या किसी जगह को एक्सप्लोर करने का तरीका, युवा पीढ़ी अपनी ट्रिप्स में भी अपने परिवार की परंपराओं को साथ लेकर चल रही है।
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(AI Generated Image)
यादों से कहीं ज्यादा है यह जुड़ाव
इनहेरिटूरिज्म के जरिए परिवार की ट्रैवल से जुड़ी आदतों और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है। यानी पेरेंट्स से साथ ट्रैवल न करते हुए भी अपने परिवार से जुड़े रहने का एक अनूठा तरीका है। यह दिखाता है कि बचपन के वेकेशन हमारे दिमाग पर हमारी कल्पना से कहीं ज्यादा गहरी छाप छोड़ते हैं।
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क्या कहते हैं आंकड़े?
- होटल की पसंद- लगभग 66 प्रतिशत यात्रियों का मानना है कि उनके माता-पिता ने उनके होटल चुनने के फैसले को प्रभावित किया है।
- ट्रैवल स्टाइल- करीब 70 प्रतिशत लोगों को लगता है कि उनके घूमने-फिरने का पूरा तरीका उनके माता-पिता की पसंद से आकार लेता है।
- लॉयल्टी प्रोग्राम- लगभग 58 प्रतिशत यात्री उन्हीं लॉयल्टी प्रोग्राम्स का हिस्सा बने रहना पसंद करते हैं जिनसे उनके माता-पिता जुड़े थे।
यानी यह ट्रेंड बताता है कि हम भले ही दुनिया के किसी भी कोने में अकेले घूम रहे हों, लेकिन हमारे बैग में उन पुरानी यादों और आदतों का एक हिस्सा हमेशा रहता है जो हमें हमारे बचपन और परिवार की याद दिलाता रहता है।