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    साइबर ठगों का नया ‘कैश आउट गैंग’ बेनकाब: हर शहर में तैनात पेड एजेंट, ठगी होते ही मिनटों में खाली कर देते हैं खाता

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 09:28 PM (IST)

    पुलिस की खाता फ्रीज कार्रवाई को बेअसर करने के लिए साइबर ठगों ने बदला रकम निकासी का तरीका। हर ठगी के लिए नया म्यूल खाता। एक राज्य से ठगी, दूसरे राज्य क ...और पढ़ें

    -प्रतीकात्मक चित्र

    -प्रतीकात्मक चित्र

    HighLights

    1. साइबर ठगों का 'कैश आउट गैंग' हुआ बेनकाब।

    2. हर शहर में पेड एजेंट तुरंत निकालते हैं ठगी की रकम।

    3. तिहाड़ जेल से जुड़ा है इस गिरोह का कनेक्शन।

    प्रशांत व्यास, भोपाल। साइबर ठगी के मामले में जांच कर रही पुलिस को इनके नेटवर्क की अहम जानकारी मिली है। ठगों ने हर शहर में अपने ऐसे 'पेड एजेंट' बैठा दिए हैं जो या तो सैलरी पर काम कर रहे हैं या कमीशन पर। वह ठगी की राशि खाते में आते ही एटीएम से नकदी निकाल कर खाता खाली कर देते हैं। इससे जब तक पुलिस खाता फ्रीज कराती है, तब तक रकम निकाली जा चुकी होती है।

    चौंकाने वाली बात यह भी है कि ठगी के बाद दूसरे राज्य के म्यूल खाते में धनराशि डाली जाती है और एटीएम से उसकी निकासी किसी अन्य राज्य में हो जाती है। इससे जांच प्रक्रिया उलझ कर रह जा रही है। इस पुलिस नेटवर्क को "कैश आउट गैंग" बता रही है।

    खाता फ्रीज करना भी बेअसर

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब तक साइबर ठग ठगी की रकम को कई बैंक खातों में ट्रांसफर कर उसकी लेयरिंग करते थे, लेकिन एनसीसीआरपी पोर्टल पर शिकायत मिलते ही संदिग्ध खातों को फ्रीज किया जाने लगा। ठगों ने इससे बचने का रास्ता निकाल लिया। अब वे हर साइबर ठगी के लिए नया बैंक खाता उपयोग में ला रहे हैं। एजेंटों को तीन प्रतिशत कमीशन या वेतन पर रखा है।

    ऐसे खुला गिरोह का राज

    शहर के हमीदिया अस्पताल की एक महिला डॉक्टर ऑनलाइन गेम खेलते समय करीब एक लाख रुपये की साइबर ठगी का शिकार हो गई। डॉक्टर राजस्थान की मूल निवासी थीं। उनके दस्तावेजों में राजस्थान का ही पता लिखा था। इसी से ठग भ्रमित हो गए। उन्होंने ठगी की रकम छत्तीसगढ़ के म्यूल खाते में जमा तो कराई, लेकिन एटीएम से निकासी भोपाल में बैठे अपने एजेंट से ही करा दी।

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    भोपाल से निकासी होते ही पुलिस सक्रिय हुई और पेड एजेंट जोधपुर निवासी महेश और विकास तक पहुंच गई। दोनों छात्र हैं। पूछताछ में दोनों ने बताया कि उनके ही तरह लगभग हर बड़े शहर में ऐसे एजेंट हैं, जो कि ठगी की रकम निकालकर मास्टरमाइंड के खातों में भेजते हैं।

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    तिहाड़ से शुरू हुई कहानी

    पूछताछ में खुलासा हुआ कि करतार सिंह नामक म्यूल अकाउंट एजेंट की मुलाकात तिहाड़ जेल में साइबर ठगी के मामले में बंद राजस्थान के एक साइबर सरगना के भाई से हुई थी। वहीं से इस नेटवर्क की नींव पड़ी। पिछले करीब एक वर्ष में करतार देशभर में सैकड़ों बैंक खाते खुलवाकर गिरोह को उपलब्ध करा चुका है।

    यह गिरोह केवल ऐसे करंट खाते या उच्च निकासी सीमा वाले बैंक खाते खरीदता है, जिनसे प्रतिदिन कम से कम एक लाख रुपये निकाले जा सकें। इन खातों के डेबिट कार्ड, पासबुक और अन्य दस्तावेज पहले से ही कमीशन एजेंटों के पास रहते हैं, ताकि ठगी की रकम आते ही बिना देरी उसे निकाल लिया जाए।

    पुलिस ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो साइबर ठगी के मास्टरमाइंड के लिए सीधे काम करता था। ये आरोपित ठगी की रकम म्यूल खातों से तत्काल एटीएम से निकालकर आगे जमा कर देते थे, ताकि पुलिस की ट्रेल टूट जाए।
    - संजय कुमार, पुलिस आयुक्त भोपाल।