त्विशा केस की जांच के बीच पूर्व जज गिरिबाला सिंह का न्यायिक इतिहास सुर्खियों में, 12 हत्यारों को दिलाई थी उम्रकैद
त्विशा शर्मा मौत मामले में न्यायिक हिरासत में भेजी गईं पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह का सख्त न्यायिक रिकॉर्ड चर्चा में है। उन्होंने अपने कार्यकाल में ...और पढ़ें

कोर्ट परिसर में सीबीआई टीम के साथ गिरिबाला सिंह (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। मॉडल और अभिनेत्री त्विशा शर्मा की ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में न्यायिक हिरासत में भेजी गईं पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। त्विषा केस के बहाने उनके लंबे और सख्त न्यायिक रिकॉर्ड पर चर्चा की जा रही है, जिसका उल्लेख जेल में विशेष सुरक्षा और अलग बैरक की मांग के दौरान किया गया।
अदालती अभिलेखों और सेवा रिकॉर्ड के अनुसार, गिरिबाला सिंह ने अपने न्यायिक कार्यकाल में कई संवेदनशील और चर्चित आपराधिक मामलों की सुनवाई करते हुए कठोर फैसले सुनाए थे। हत्या, गंभीर अपराध और पॉक्सो मामलों में दोषसिद्धि के कई आदेश उनके न्यायिक रिकॉर्ड का हिस्सा रहे हैं।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में सुनाए अहम फैसले
गिरिबाला सिंह करीब 19 महीने तक भोपाल की प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रहीं और फरवरी 2023 में इसी पद से सेवानिवृत्त हुईं। इस दौरान उनके समक्ष 1,129 प्रकरण विचारार्थ आए। इनमें 56 सेशन ट्रायल मामलों में निर्णय सुनाए गए, जिनमें 27 आरोपितों को दोषी ठहराया गया।
इन दोषसिद्ध मामलों में 12 हत्या के आरोपित भी शामिल थे, जिन्हें अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। न्यायिक हलकों में उन्हें सख्त और निष्पक्ष निर्णयों के लिए जाना जाता रहा है।
अपर सत्र न्यायाधीश रहते भी दिखाया कड़ा रुख
प्रधान जिला न्यायाधीश बनने से पहले सितंबर 2015 से नवंबर 2017 तक गिरिबाला सिंह भोपाल में अपर सत्र न्यायाधीश के पद पर पदस्थ रहीं। लगभग 27 महीने के कार्यकाल में उन्होंने 31 आपराधिक मामलों का निपटारा किया। इनमें 12 मामलों में आरोपियों को दोषी ठहराया गया, जबकि एक हत्या के मामले में आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
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पॉक्सो मामलों में भी दोषियों के खिलाफ सख्ती
गिरिबाला सिंह ने बच्चों के खिलाफ अपराधों से जुड़े पॉक्सो मामलों में भी कड़ा रुख अपनाया। अपर सत्र न्यायाधीश के रूप में उन्होंने 22 पॉक्सो मामलों का फैसला सुनाया, जिनमें 10 आरोपितों को दोषी करार देते हुए जेल भेजा गया।
सुरक्षा मांग में न्यायिक रिकॉर्ड का दिया गया हवाला
सूत्रों के मुताबिक, न्यायिक हिरासत के दौरान जेल में विशेष सुरक्षा और अलग बैरक की मांग करते समय गिरिबाला सिंह की ओर से उनके न्यायिक रिकॉर्ड का उल्लेख किया गया। तर्क दिया गया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में हत्या, संगीन अपराध और पॉक्सो जैसे मामलों में कई आरोपितों को सजा सुनाई है, ऐसे में सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता आवश्यक है। इस संबंध में अदालत ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
उल्लेखनीय है कि त्विशा शर्मा की मौत के मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय एजेंसियों के स्तर पर जारी है और प्रकरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। ऐसे में इस हाई-प्रोफाइल मामले के बीच गिरिबाला सिंह का न्यायिक अतीत भी सुर्खियों में आ गया है।