मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में स्वीकारा- लापरवाही के कारण हुई भागीरथपुरा की घटना, इंदौर शहर पर लगा दाग
मप्र विधानसभा में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल का मुद्दा उठा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे 'सिस्टम द्वारा हत्या' बताया और सरकार पर बड़े अधिका ...और पढ़ें

नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय (फाइल फोटो)

समय कम है?
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राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल का मुद्दा उठा। कांग्रेस विधायकों ने दस स्थगन सूचनाएं दीं। जिसे स्वीकार किया जाए या नहीं, इस पर डेढ़ घंटे बहस हुई।
इस दौरान नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्वीकार किया कि इंदौर शहर के भागीरथपुरा में दूषित जलकांड लापरवाही के कारण हुआ। इससे इंदौर शहर पर दाग लगा है। दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। हाई कोर्ट ने संज्ञान लेकर आयोग गठित किया है, जिस पर काम प्रारंभ हो गया है, इसलिए इस पर चर्चा नहीं कराई जानी चाहिए।
वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि 2019 में प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने 60 नमूने लेकर जांच की थी, जिसमें 59 खराब निकले, फिर भी सरकार नहीं चेती, इसलिए ये सामान्य मृत्यु नहीं सिस्टम द्वारा की गई हत्या हैं। केवल निचले स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई करके सरकार मंत्री, महापौर और वरिष्ठ अधिकारियों को बचाना चाहती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं, जब न्यायालय में प्रचलित विषयों पर चर्चा कराई गई है। प्रदेश ज्वालामुखी पर बैठा है। क्या जब कोई दूसरा भागीरथपुरा बनेगा तब चर्चा कराई जाएगी। सभी पक्षों को सुनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने स्थगन प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया। हंगामे के कारण दस मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित की गई। बाद में विपक्ष ने सरकार पर कार्रवाई न करने और चर्चा से बचने का आरोप लगाकर बहिर्गमन कर दिया।
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भागीरथपुरा में हैं अशिक्षित, इस कारण काम करने में परेशानी : विजयवर्गीय
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि यह गंभीर आत्मग्लानि वाली घटना है। स्वीकार करता हूं कि संसाधन थे। पैसा नगर निगम को दिया। फिर भी समय पर काम नहीं हुआ। दूषित जल की नागरिकों और पार्षद ने शिकायत की। महापौर ने टेंडर कराए। विलंब हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कमेटी बनाई। दोषियों पर कार्रवाई हुई। भागीरथपुरा मुंबई की धारावी का छोटा रूप कहा जा सकता है। यहां अशिक्षित लोग रहते हैं इसलिए निगमकर्मियों को काम करने में परेशानी आती है।
विजयवर्गीय बोले कि मेरे लिए आसान था कि कह देता हमने पैसे दे दिए। महापौर काम करें। स्वयं मुख्यमंत्री यहां के प्रभारी मंत्री हैं। इंदौर की जनता ने मुझे नौ बार जिताया है। यह मेरी रगों में बसा है। इंदौर पर जो कलंक लगा है, उसे धो डालेंगे, क्योंकि हम गिरकर उठना जानते हैं। 2,261 करोड़ रुपये के काम चल रहे हैं। छह हजार करोड़ रुपये से पाइप लाइन बिछेगी, जिससे शहर की आगामी बीस वर्ष की पानी की आवश्यकता पूरी होगी। पूरे प्रदेश में जहां से भी दूषित जल की शिकायत आ रही है, कार्रवाई कर रहे हैं। यह सियासत का मुद्दा नहीं है।
जिन्होंने स्वजन खोए, उनसे पूछो चर्चा होनी चाहिए या नहीं : सिंघार
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सत्ता पक्ष लगा है कि चर्चा न हो। जिन्होंने स्वजन खोए हैं, उनसे जाकर पूछो कि चर्चा होनी चाहिए या नहीं। दो-ढाई हजार करोड़ रुपये के काम तीन वर्ष में स्वीकृत हुए, पर एक धेला भी खर्च नहीं हुआ। जब तक 'वजन' ना हो, अधिकारी फाइल आगे नहीं बढ़ाते हैं। हमारे नेता संवेदना व्यक्त करने गए थे, न कि राजनीति करने। आरटीआई में बताया कि एक रात में पांच किलोमीटर सीवेज की लाइन डाली गई। 150 करोड़ रुपये के फर्जी बिल बनाकर निकाल लिए गए। जब न्यायालय ने कहा कि हेल्थ इमरजेंसी है, तब जाकर सरकार जागी।
सैंपल लेकर पहुंचे घनघोरिया
जबलपुर जिले से कांग्रेस के एकमात्र विधायक लखन घनघोरिया सदन में दूषित जल के सैंपल लेकर पहुंचे। इन्हें दिखते हुए कहा कि जांच में पानी काला हो गया है। इसमें लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह का भी क्षेत्र शामिल है।
वहीं, सचिन यादव और जयवर्धन सिंह ने कहा कि महापौर असहाय हैं। वे कहते हैं कि अधिकारी फोन नहीं उठाते हैं। प्रश्न के उत्तर में एक जगह 20 और दूसरी जगह 32 मौतें स्वीकार की जाती हैं। जब शहर को स्वच्छता पुरस्कार मिलता है तो फोटो खिंचवाने मंत्री, महापौर और बड़े अधिकारी जाते हैं, लेकिन जब घटना होती है तो कोई जिम्मेदारी नहीं लेते।
फिर खुली नियमों की किताब
स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराई जाए या नहीं, इसे लेकर फिर विधानसभा में नियमों की किताब खुली। पूर्व अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा ने नियमों का हवाला देते हुए एक बार फिर कहा कि न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण में सदन में चर्चा नहीं कराई जाती है। आयोग ने काम प्रारंभ कर दिया है। उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने इसका विरोध करते हुए कहा कि डॉ. शर्मा विधानसभा अध्यक्ष थे, तब दो जुलाई 2014 में ऐसे ही विषय पर चर्चा कराई गई थी। क्या आगे कोई मौत ना हो, इसे रोकने के लिए चर्चा भी नहीं होगी।