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    कचौरी-समोसे के तेल से उड़ेगा विमान! MANIT के वैज्ञानिकों की नई तकनीक से बनेगा सस्ता और ग्रीन एविएशन फ्यूल

    By Naman MishraEdited By: Ravindra Soni
    Updated: Mon, 04 May 2026 03:44 PM (IST)

    मैनिट भोपाल के वैज्ञानिकों ने इस्तेमाल किए गए खाद्य तेल से विमानन ईंधन बनाने की एक नई और किफायती तकनीक विकसित की है। यह स्वदेशी तकनीक पर्यावरण के अनुक ...और पढ़ें

    यूज्ड ऑयल से बनेगा एविएशन फ्यूल (इनसेट- मैनिट प्रयोगशाला में बाएं डॉ. सुमित एच. धावने, बीच में शोधार्थी रेहान खान और दाहिने डॉ. रामकिशोर अनंत।)

    यूज्ड ऑयल से बनेगा एविएशन फ्यूल (इनसेट- मैनिट प्रयोगशाला में बाएं डॉ. सुमित एच. धावने, बीच में शोधार्थी रेहान खान और दाहिने डॉ. रामकिशोर अनंत।)

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    नमन मिश्रा, भोपाल। अब पूड़ी-पकौड़ी और समोसे तलने के बाद बचा हुआ तेल बेकार नहीं जाएगा( उसी से हवाई जहाज उड़ाने का रास्ता तैयार हो गया है। भोपाल स्थित मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) के वैज्ञानिकों ने इस्तेमाल हो चुके खाद्य तेल से वैमानिकी ईंधन (एविएशन फ्यूल) बनाने की एक नई और किफायती तकनीक विकसित की है, जो पर्यावरण के लिहाज से भी अधिक सुरक्षित मानी जा रही है।

    दो साल की मेहनत से तैयार हुई स्वदेशी तकनीक

    इस अभिनव शोध को रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग के डॉ. सुमित एच. धावने, पदार्थ एवं धातुकर्म अभियांत्रिकी विभाग के डॉ. रामकिशोर अनंत और शोधार्थी रेहान खान की टीम ने विकसित किया है। करीब दो साल पहले शुरू हुई यह परियोजना वैश्विक स्तर पर जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने के प्रयासों का हिस्सा है।

    कैसे बनता है ‘किचन वेस्ट’ से एविएशन फ्यूल?

    वैज्ञानिकों ने एक विशेष उत्प्रेरक (कैटेलिस्ट) की मदद से खराब खाद्य तेल को रिएक्टर में छोटे-छोटे हाइड्रोकार्बन अणुओं में बदलने की प्रक्रिया विकसित की है। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया के दौरान आवश्यक हाइड्रोजन भी खुद ही उत्पन्न हो जाती है और उसी का उपयोग ईंधन तैयार करने में किया जाता है।

    यानी पूरी तकनीक “इन-सीटू हाइड्रोजन” पर आधारित है, जो इसे पारंपरिक हाइड्रोक्रैकिंग तकनीक से अधिक सरल, सस्ती और आत्मनिर्भर बनाती है।

    कम लागत, कम प्रदूषण : डबल फायदा

    इस नई तकनीक के दो बड़े फायदे सामने आए हैं—पहला, उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी और दूसरा, जीवाश्म ईंधन आधारित हाइड्रोजन पर निर्भरता घटने से कार्बन उत्सर्जन में कमी। इससे पर्यावरणीय नुकसान भी कम होगा। इस शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित किया जा चुका है और मैनिट ने इसके पेटेंट के लिए आवेदन भी कर दिया है।

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    IOC की पहल से एक कदम आगे का दावा

    गौरतलब है कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) ने पानीपत में इस्तेमाल हो चुके खाद्य तेल से एविएशन फ्यूल बनाने का प्लांट स्थापित किया है। हालांकि, मैनिट के वैज्ञानिकों का कहना है कि उनकी तकनीक उससे एक कदम आगे है, क्योंकि इसमें बाहरी हाइड्रोजन की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे लागत और प्रदूषण दोनों में कमी आती है।

    तकनीक को पेटेंट मिलने के बाद इसके व्यावसायिक उपयोग की दिशा में भी तेजी से कदम बढ़ाए जाएंगे, जिससे भविष्य में ‘किचन वेस्ट’ से उड़ान भरते विमान एक नई हकीकत बन सकते हैं।