MP के कॉलेजों में अब ग्लोबल एजुकेशन : 22 भारतीय भाषाओं के साथ 7 विदेशी भाषाएं भी पढ़ेंगे छात्र, खुलेंगे रोजगार के नए द्वार
मध्य प्रदेश के 68 कॉलेजों में नए सत्र से छात्रों को 22 भारतीय और 7 विदेशी भाषाएं सीखने का अवसर मिलेगा। यह ऑनलाइन प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम 6 महीने का होगा, ...और पढ़ें

HighLights
68 कॉलेजों में 22 भारतीय, 7 विदेशी भाषाएं पढ़ाई जाएंगी।
6 माह का ऑनलाइन प्रमाणपत्र कोर्स, शुल्क 500 रुपये।
सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड से जापान-जर्मनी में नौकरी का अवसर।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश के कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए नवीन शैक्षणिक सत्र से वैश्विक अवसरों के द्वार खुलने जा रहे हैं। राज्य के 68 पीएमश्री और स्वशासी महाविद्यालयों में अब 22 भारतीय भाषाओं के साथ-साथ सात विदेशी भाषाओं का अध्ययन कराया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग ने इसकी तैयारियां पूरी कर ली हैं और अगले सत्र से छह माह का प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा।
इस योजना के तहत चीन की मंदारिन और रूस की रशियन भाषा भी विद्यार्थियों को सिखाई जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने स्वशासी महाविद्यालयों और उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान को नोडल केंद्र बनाया है। सभी भाषाओं के पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए एक समिति गठित की गई है, जो 30 जनवरी तक सिलेबस तैयार कर उपलब्ध कराएगी।
ऑनलाइन होगा कोर्स, नाममात्र शुल्क
यह प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम पूरी तरह ऑनलाइन होगा, जिसकी अवधि 60 घंटे तय की गई है। विद्यार्थियों को एक भाषा सीखने के लिए मात्र 500 रुपये शुल्क देना होगा। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य विदेशी भाषाओं के महत्व को समझाना और विद्यार्थियों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय रोजगार के लिए तैयार करना है।
तैयार है भारतीय भाषाओं की योजना
महाविद्यालयों में पहले ही तेलुगू, तमिल, कन्नड़, मराठी, मलयालम, सिंधी, मणिपुरी, ओड़िया, असमी, बांग्ला, पंजाबी और गुजराती सहित 22 भारतीय भाषाएं पढ़ाने की योजना तैयार की जा चुकी है।
ये विदेशी भाषाएं सिखाई जाएंगी
प्रस्ताव के अनुसार महाविद्यालयों में
जर्मन
फ्रेंच
रशियन
कोरियन
स्पेनिश
मंदारिन
जापानी
भाषाएं पढ़ाई जाएंगी। इसके लिए कॉलेज स्तर पर भाषा विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी।
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सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड से विदेश में नौकरी का रास्ता
इसी क्रम में राज्य सरकार सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड लाने की तैयारी में भी जुटी है। इसके तहत प्रदेश के 600 ओबीसी युवाओं को जापान और जर्मनी में प्लेसमेंट दिलाने की योजना बनाई गई है। पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक विभाग ने इसका मसौदा तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट में मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
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मंजूरी मिलने पर मध्य प्रदेश सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा। इस योजना के तहत राज्य स्तर पर युवाओं की स्क्रीनिंग होगी। चयनित युवाओं को पर्सनैलिटी ग्रूमिंग के साथ संबंधित देश की भाषा का प्रशिक्षण दिया जाएगा। जापान और जर्मनी ने 300-300 पदों की जानकारी दी है। इस प्रोजेक्ट में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम को पार्टनर बनाया गया है। योजना के लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपये का बजट तय किया है, जिसमें पहले चरण में 20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
प्रदेश के 68 महाविद्यालयों में नए सत्र से विभिन्न क्षेत्रीय भाषाएं सिखाई जाएंगी। इनके साथ सात विदेशी भाषाओं को सिखाने की भी तैयारी है। यह सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम होगा।
- अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग