Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    MP में बिजली उपभोक्ताओं को झटका... KW नहीं, KVA के आधार पर बनेगा बिल; 15% तक बढ़ सकता है खर्च

    Updated: Mon, 12 Jan 2026 06:59 PM (IST)

    मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को अब किलोवाट (kW) के बजाय किलो-वोल्ट एम्पीयर (kVA) के आधार पर बिल मिलेगा। मप्र मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने य ...और पढ़ें

    बिजली बिल में हो सकता है इजाफा (प्रतीकात्मक चित्र)

    बिजली बिल में हो सकता है इजाफा (प्रतीकात्मक चित्र)

    HighLights

    1. बिजली बिल अब किलोवाट के बजाय KVA पर आधारित होगा।

    2. उपभोक्ताओं का बिजली खर्च 15% तक बढ़ने का अनुमान है।

    3. तकनीकी लॉस का भार भी अब उपभोक्ता वहन करेंगे।

    डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब बिजली बिल किलोवाट (kW) की बजाय किलो-वोल्ट एम्पीयर (kVA) के आधार पर तैयार किया जाएगा। मप्र मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बिलिंग फॉर्मूले में यह अहम बदलाव प्रस्तावित किया है, जिसे 2026-27 के टैरिफ प्रस्ताव के तहत मप्र विद्युत नियामक आयोग को भेजा गया है। इस बदलाव का सीधा असर प्रदेश भर के हजारों उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।

    इस नई व्यवस्था में उपभोक्ताओं से केवल वास्तविक खपत ही नहीं, बल्कि तकनीकी लॉस (अनुपयोगी बिजली) का भी शुल्क लिया जाएगा। अकेले भोपाल जिले में ही करीब 33 हजार उपभोक्ता इस दायरे में आएंगे, जिनमें बड़े संस्थान और औद्योगिक उपभोक्ता भी शामिल हैं। अनुमान है कि कई उपभोक्ताओं का बिजली बिल 15 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

    क्या है KVA और कैसे बदलेगा बिल?

    किलोवाट (kW) बिजली की वास्तविक खपत को दर्शाता है, जबकि किलो-वोल्ट एम्पीयर (kVA) कुल आपूर्ति की गई बिजली को बताता है, जिसमें तकनीकी लॉस भी शामिल होती है। पुराने उपकरण, जर्जर वायरिंग और खराब पावर फैक्टर के कारण होने वाला नुकसान अब सीधे उपभोक्ता के बिल में जुड़ेगा।

    शुरुआत में यह व्यवस्था एचटी (हाई टेंशन) उपभोक्ताओं पर लागू की जाएगी। भोपाल जिले में फिलहाल करीब 33 हजार एचटी उपभोक्ता हैं। आगे चलकर अन्य श्रेणियों के उपभोक्ताओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

    तकनीकी लॉस पर पहले ही खर्च हो चुके 3 हजार करोड़

    भोपाल में बिजली लाइनों के तकनीकी नुकसान को कम करने के लिए बीते 15 वर्षों में करीब 3,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसमें एचवीडीएस सिस्टम, नई लाइनें, फीडर सेपरेशन और ट्रांसफार्मर व सब-स्टेशन क्षमता बढ़ाने जैसे काम शामिल हैं। बावजूद इसके औसतन 15 प्रतिशत तक तकनीकी लॉस बना हुआ है, जिसका बोझ अब नए बिलिंग सिस्टम में उपभोक्ताओं पर शिफ्ट हो जाएगा।

    खबरें और भी

    लापरवाही बढ़ाएगी बिल, सतर्कता देगी राहत

    केवीए आधारित बिलिंग में वही उपभोक्ता लाभ में रहेंगे, जिनके परिसर में ट्रांसफार्मर, वायरिंग और विद्युत उपकरण आधुनिक व अच्छी स्थिति में होंगे। ऐसे मामलों में केवीए और किलोवाट लगभग बराबर रहेगा और बिल में खास फर्क नहीं पड़ेगा।
    लेकिन जहां पुरानी वायरिंग, पुराने उपकरण और खराब पावर फैक्टर होगा, वहां केवीए और किलोवाट में अंतर बढ़ेगा और बिजली बिल भी ज्यादा आएगा।

    यह भी पढ़ें- MP के कॉलेजों में अब ग्लोबल एजुकेशन : 22 भारतीय भाषाओं के साथ 7 विदेशी भाषाएं भी पढ़ेंगे छात्र, खुलेंगे रोजगार के नए द्वार

    बिजली कंपनी को क्या होंगे फायदे?

    • लाइन लॉस में कमी।
    • ट्रांसफार्मर और केबल पर दबाव घटेगा। 
    • सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ेगी। 


    केवीए बिलिंग का उद्देश्य

    • पावर फैक्टर में सुधार।
    • ग्रिड पर अनावश्यक लोड कम करना।
    • बिजली आपूर्ति को अधिक कुशल बनाना।
    • उपभोक्ताओं को तकनीकी रूप से जिम्मेदार बनाना।