MP में सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: एक महीने में 40 हजार और प्रमोशन, अगले साल की तैयारी भी शुरू
मध्य प्रदेश में करीब एक दशक के इंतजार के बाद कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया तेज हो गई है। सरकार ने अगले वर्ष 2026 की पदोन्नति के लिए भी तैयारियां श ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र
HighLights
60 हजार कर्मचारियों को मिली पदोन्नति, 40 हजार और जल्द।
अगले वर्ष 2026 की पदोन्नति प्रक्रिया की तैयारी भी शुरू।
वर्तमान पदोन्नतियां हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। करीब एक दशक के लंबे इंतजार के बाद मध्य प्रदेश में अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया रफ्तार पकड़ चुकी है। राज्य सरकार अब तक लगभग 60 हजार कर्मचारियों को पदोन्नति दे चुकी है, जबकि अगले एक महीने के भीतर 35 से 40 हजार और कर्मचारियों के प्रमोशन आदेश जारी होने की संभावना है।
इधर, सरकार ने अगले वर्ष की पदोन्नति प्रक्रिया को भी समय से पूरा करने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। सितंबर और अक्टूबर में विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठकें आयोजित करने का निर्णय लिया गया है, ताकि 1 जनवरी 2026 को उपलब्ध पदों के आधार पर समय पर पदोन्नतियां दी जा सकें।
अगले साल की पदोन्नति के लिए अभी से तैयारी
सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में जो पदोन्नतियां दी जा रही हैं, वे 1 जनवरी 2025 को उपलब्ध रिक्त पदों के आधार पर हैं। चूंकि पिछले दस वर्षों से प्रमोशन रुके हुए थे, इसलिए विशेष विभागीय पदोन्नति समितियों के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
सरकार का उद्देश्य यह है कि हाल ही में पदोन्नत हुए कर्मचारी और उच्च पदों के लिए पात्र बन चुके अधिकारी समय पर अगली पदोन्नति भी प्राप्त कर सकें। इसी वजह से आगामी डीपीसी बैठकों की तैयारी पहले से शुरू कर दी गई है।
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गोपनीय रिपोर्ट और विजिलेंस क्लियरेंस पर रहेगा फोकस
पदोन्नति प्रक्रिया में अधिकारियों और कर्मचारियों की पिछले पांच वर्षों की गोपनीय चरित्रावली (एसीआर) का परीक्षण, विजिलेंस क्लियरेंस और अन्य प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। इन प्रक्रियाओं में देरी न हो, इसलिए विभागों को अभी से आवश्यक तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
उधर, पदोन्नति नियम-2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सोमवार को जबलपुर हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इसमें नियम को लेकर निर्णय सुनाया जा सकता है।
फिलहाल, पदोन्नति नियम-2025 के तहत जारी सभी प्रमोशन न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन (सशर्त) हैं। यानी अदालत के अंतिम आदेश के बाद ही इन पदोन्नतियों की वैधानिक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
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अपर सचिव को नहीं दी गई नई जिम्मेदारी
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया को फिलहाल रतलाम कलेक्टर का कार्यभार ग्रहण करने से रोक दिया गया है। पदोन्नति से जुड़े पूरे मामले की निगरानी वही कर रहे हैं और प्रक्रिया की सभी कानूनी व प्रशासनिक बारीकियों से भली-भांति परिचित हैं।