MP में सलाखों के पीछे सिसकता बचपन: कैदी मां के साथ जेल रहने को मजबूर छह वर्ष तक के 112 बच्चे
पूजा पांडे की जमानत के बाद मध्य प्रदेश की जेलों में अपनी माताओं के साथ रह रहे 112 बच्चों का मुद्दा फिर चर्चा में है। ये बच्चे सलाखों के पीछे बचपन बिता ...और पढ़ें

मां के साथ कैदी जैसी जिंदगी जीने को मजबूर बच्चे (प्रतीकात्मक चित्र)

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राज्य ब्यूरो, भोपाल। सिवनी हवाला कांड में जेल में बंद निलंबित एसडीओपी पूजा पांडे को सुप्रीम कोर्ट से इस आधार पर जमानत मिली कि वह सिंगल पैरेंट हैं और उनकी दो साल की बच्ची भी उनके साथ जेल में रह रही थी। लेकिन इस फैसले ने मध्य प्रदेश की जेलों में अपनी माताओं के साथ रहने को मजबूर उन 112 बच्चों की स्थिति को फिर चर्चा में ला दिया है, जिनका बचपन सलाखों के साये में गुजर रहा है।
प्रदेश की विभिन्न जेलों में ऐसे कई मामले मौजूद हैं, जहां महिला कैदियों के छोटे बच्चे उनके साथ रह रहे हैं। इनमें कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं, जिनकी परिस्थितियां पूजा पांडे के मामले जैसी हैं और वे जमानत के लिए मजबूत आधार रखती हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच ही नहीं बना पा रही हैं।
प्रदेश की जेलों में 1600 महिला कैदी
आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश की जेलों में करीब 1600 महिला और 42 हजार पुरुष कैदी बंद हैं। अकेले भोपाल जेल में 191 महिला कैदी हैं, जिनमें से 102 को दोषी करार दिया जा चुका है, जबकि बाकी मामलों में सुनवाई जारी है।
इन महिला कैदियों के साथ छह वर्ष तक की आयु के 12 बच्चे भी जेल में रह रहे हैं। जेल नियमावली के तहत छह साल तक के बच्चों को मां के साथ रहने की अनुमति दी जाती है, ताकि वे मातृत्व से पूरी तरह वंचित न हों।
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सलाखों के बीच बीत रहा बचपन
महिला कैदियों को सश्रम कारावास के दौरान विभिन्न प्रकार के कार्य भी करने पड़ते हैं। ऐसे में छोटे बच्चों की देखभाल प्रभावित होती है और मां भी अपने बच्चे के साथ सामान्य पारिवारिक समय नहीं बिता पाती।
हालांकि जेल प्रशासन बच्चों के लिए कुछ सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा करता है। रविवार का दिन इन बच्चों के लिए खास माना जाता है, जब परिवार के सदस्य उनसे मिलने आते हैं। मुलाकात के लिए आधे घंटे का समय तय किया गया है।
प्ले एरिया और जेल स्कूल की सुविधा
जेल महानिदेशक वरुण कपूर के अनुसार, जेलों में बच्चों के लिए प्ले एरिया बनाए गए हैं। साथ ही उन्हें जेल परिसर में संचालित स्कूलों में पढ़ाई की सुविधा भी दी जाती है। चूंकि अधिकतर बच्चे छह वर्ष तक की उम्र के होते हैं, इसलिए वे केजी-1 और केजी-2 स्तर तक की पढ़ाई कर पाते हैं।
उन्होंने बताया कि महिला कैदियों के लिए खुली जेल (ओपन जेल) की व्यवस्था शुरू करने का प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है, जिस पर जल्द निर्णय होने की संभावना है।
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