MP में राज्य सभा की तीसरी सीट बनी सियासी रणभूमि: कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर, भाजपा की नजर ‘हैट्रिक’ पर
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद तीसरी सीट पर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर है, जबकि भाजपा इस ...और पढ़ें

राज्य सभा चुनाव (प्रतीकात्मक चित्र)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, भोपाल। राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही मध्य प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। तीन सीटों पर होने वाले चुनाव में जहां दो सीटों पर भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, वहीं तीसरी सीट इस बार सबसे ज्यादा चर्चा और सियासी गणित का केंद्र बन गई है। कांग्रेस के लिए यह सीट आसान दिखने के बावजूद अब चुनौती बनती नजर आ रही है।
कांग्रेस की चिंता का सबसे बड़ा कारण संभावित क्रॉस वोटिंग है। यदि पार्टी के कुछ विधायक अलग रुख अपनाते हैं तो उसके हाथ से यह सीट निकल सकती है। दूसरी ओर भाजपा इसी संभावित स्थिति को अपने पक्ष में भुनाने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है।
2020 की याद फिर हुई ताजा
राज्यसभा चुनाव की मौजूदा तस्वीर ने एक बार फिर वर्ष 2020 के राजनीतिक घटनाक्रम की यादें ताजा कर दी हैं। उस समय कांग्रेस एक सीट पर दिग्विजय सिंह को उतार चुकी थी, जबकि दूसरी सीट पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को मैदान में लाने की तैयारी थी। लेकिन चुनाव से पहले ही कांग्रेस में बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ और विधायकों के टूटने से पूरे समीकरण बदल गए थे।
अब एक बार फिर कांग्रेस के सामने अपने विधायकों को एकजुट बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। पार्टी के भीतर मौजूद असंतोष और गुटीय समीकरण भी उसकी रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
कांग्रेस के पास संख्या है, लेकिन चुनौती भी
वर्तमान विधानसभा स्थिति को देखें तो दतिया सीट से विधायक रहे राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। हालांकि विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर न्यायालय की रोक और बीना विधायक निर्मला सप्रे से जुड़ा मामला लंबित होने के कारण प्रभावी संख्या घटकर 62 रह गई है।
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राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोट जरूरी हैं। संख्या के हिसाब से कांग्रेस फिलहाल इस आंकड़े तक पहुंचती दिख रही है, लेकिन यदि क्रॉस वोटिंग हुई तो समीकरण बदल सकते हैं।
भाजपा तीसरी सीट पर भी बना सकती है दांव
भाजपा के पास वर्तमान में 164 विधायक हैं। दो सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के बाद भी उसके पास अतिरिक्त वोट बच सकते हैं। ऐसे में यदि उसे अन्य समर्थन या विपक्ष में सेंध लगाने का मौका मिला तो पार्टी तीसरी सीट पर भी प्रत्याशी उतार सकती है।
इधर कांग्रेस में संभावित उम्मीदवारों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। मीनाक्षी नटराजन और कमल नाथ सहित कुछ नाम सामने आ रहे हैं। राजनीतिक संकेत यह भी हैं कि भाजपा की रणनीति को देखते हुए कांग्रेस किसी आदिवासी या दलित चेहरे पर भी दांव खेल सकती है।