सिंहस्थ-2028 होगा हाईटेक: AI से मिलेगा ट्रैफिक अपडेट, भीड़ प्रबंधन और इमरजेंसी सहायता
मध्य प्रदेश सरकार सिंहस्थ-2028 को तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से लैस करने की तैयारी कर रही है, जिसमें गूगल क्लाउड इंडिया का सहयोग लिया जाएगा। इस ...और पढ़ें

सीएम मोहन यादव ने की गूगल क्लाउड इंडिया के अधिकारियों के साथ बैठक।

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राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में सिंहस्थ-2028 को तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से लैस करने की दिशा में बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार गूगल क्लाउड इंडिया के सहयोग से एआई आधारित ट्रैफिक, भीड़ नियंत्रण और आपात सेवा प्रणाली विकसित करेगी।
बुधवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गूगल क्लाउड इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रशासनिक दक्षता, एआई आधारित सुशासन और सिंहस्थ-2028 की तकनीकी तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की।
श्रद्धालुओं का मददगार बनेगा ‘सहायक’ ऐप
बैठक में “सहायक” नामक एक बहुभाषीय और वॉइस-सक्षम एआई एप्लिकेशन की अवधारणा प्रस्तुत की गई। यह ऐप सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं को रियल टाइम जानकारी उपलब्ध कराएगा।
इसमें भीड़ की स्थिति, ट्रैफिक अपडेट, मार्गदर्शन और आपातकालीन सेवाओं की जानकारी स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध होगी। इससे विशाल आयोजन के दौरान लोगों की आवाजाही और सुरक्षा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
रियल टाइम भीड़ प्रबंधन से इमरजेंसी सिस्टम तक फोकस
गूगल क्लाउड इंडिया द्वारा प्रस्तुत एआई फ्रेमवर्क में कई अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। इनमें—
- रियल टाइम भीड़ प्रबंधन।
- प्रेडिक्टिव ट्रैफिक और सुरक्षा विश्लेषण।
- एआई आधारित आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली।
- डिजिटल ट्विन मॉडल जैसी तकनीकें शामिल हैं।
इन तकनीकों के जरिए प्रशासन संभावित परिस्थितियों का पहले से आकलन कर त्वरित निर्णय ले सकेगा।
इंदौर में बनेगा AI का बड़ा केंद्र
बैठक के दौरान यह भी तय हुआ कि राज्य सरकार और गूगल क्लाउड इंडिया के सहयोग से इंदौर में एक सेंटर फॉर एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
यह केंद्र एआई आधारित नवाचार, शोध, स्किल डेवलपमेंट और तकनीकी समाधान विकसित करने का प्रमुख हब बनेगा। सरकार का लक्ष्य 10 हजार से अधिक एआई डेवलपर्स को इससे जोड़ना है, ताकि प्रदेश सहित देश और वैश्विक स्तर की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी समाधान तैयार किए जा सकें।
इन क्षेत्रों में भी गूगल के साथ मिलकर काम करेगा मप्र
- ओजस एआई फ्रेमवर्क के माध्यम से दूरस्थ क्लीनिकल निर्णय सहायता, उच्च जोखिम गर्भावस्था की पूर्व पहचान और रियल टाइम स्वास्थ्य डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा।
- किसानों को स्थानीय सलाह, बाजार मूल्य जानकारी एवं वित्तीय सेवाओं से जोड़ने के लिए जेमिनी संचालित ओपन एआई नेटवर्क विकसित किया जाएगा।
- एआई आधारित वर्चुअल ट्यूटर, व्यक्तिगत शिक्षण प्रणाली और शिक्षक सहायता उपकरण विकसित कर पांच लाख से अधिक विद्यार्थियों और एक लाख शिक्षकों को बहुभाषीय एवं अनुकूलित शिक्षण सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है।
- पुलिसिंग और जन-सुरक्षा के क्षेत्र में प्रेडिक्टिव ला एनफोर्समेंट, बिहेवियरल एनालिटिक्स और डिजिटल फोरेंसिक्स आधारित एआई समाधान प्रस्तुत किए गए, जिससे जांच और प्रतिक्रिया प्रणाली को सुदृढ़ किया जा सके।