मध्य प्रदेश: सीधी जिले के स्कूल में शराब की बोतल के साथ नशे में धुत शिक्षक का वीडियो वायरल, कलेक्टर ने किया निलंबित
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक सरकारी स्कूल के सहायक शिक्षक दिनेश प्रसाद कोल को स्कूल परिसर में शराब की बोतल के साथ नशे में धुत पाए जाने पर निलंबित क ...और पढ़ें

स्कूल में शराब की बोतल के साथ नशे में धुत शिक्षक का वीडियो वायरल(फोटो: सोशल मीडिया)

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। छात्रों ने कई बार शिकायत की थी कि वे नशे में धुत होकर कक्षाओं में आते हैं और ठीक से अपने पैरों पर खड़े भी नहीं हो पाते। छात्रों के अभिभावकों का भी कहना है कि उन्होंने कई बार शराब पीने की आदत को लेकर शिक्षक से सवाल-जवाब किए। वहीं, उनके सहकर्मियों ने भी सालों तक उन्हें अपनी आदतें सुधारने के लिए समझाने की कोशिश की।
हालांकि, प्रशासन ने उनके खिलाफ तब तक कोई कार्रवाई नहीं की, जब तक कि एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के अंदर शराब की बोतल के साथ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल नहीं हो गया।
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में लोगों के बीच आक्रोश पैदा करने वाली यह घटना सिहावल ब्लॉक के दिहुली नंबर 4 गांव के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की है। ग्रामीण ने सहायक शिक्षक दिनेश प्रसाद कोल को स्कूल परिसर में शराब की बोतल के साथ देखा और नशे में धुत होने की उनकी इस स्थिति का एक वीडियो रिकॉर्ड कर लिया।
जांच में भी नशे में मिलने के बाद हुए सस्पेंड
गुरुवार को यह क्लिप सोशल मीडिया पर आ गई और जंगल की आग की तरह फैल गई। वीडियो वायरल होते ही शिक्षा विभाग के अधिकारी हरकत में आए और स्कूल पहुंचे। स्कूल स्टाफ के अनुसार, वीडियो सामने आने के बाद स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर ने भी शिक्षक को नशे की हालत में पाया। इसके बाद, गुरुवार रात तक सीधी के कलेक्टर ने उनके निलंबन का आदेश जारी कर दिया।
उसी सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले एक अन्य शिक्षक अशोक शर्मा के लिए, उनके लापरवाह सहयोगी का निलंबन उस लंबे संघर्ष का अंत था, जो वह अकेले ही झेल रहे थे। शर्मा ने मीडिया को बताया कि मैं एक दशक से अधिक समय से इस स्कूल में पदस्थ हूं।
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दिनेश प्रसाद कोल की नियुक्ति यहां 2008 में हुई थी। पहले, इस स्कूल में लगभग 125 छात्रों का नामांकन था, लेकिन अब यह संख्या घटकर मात्र 28 रह गई है। उन्हें नशे की हालत में स्कूल आने की आदत थी। मैंने उन्हें समझाने की पूरी कोशिश की, शराब छोड़ने की सलाह दी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
अभिभावकों से करते थे बहस
शर्मा ने बताया कि कोल के खराब आचरण और पढ़ाने की जिम्मेदारियों को पूरा न करने की वजह से शर्मा पर काम का अतिरिक्त दबाव पड़ गया था। हालांकि, उन्होंने यह सोचकर अतिरिक्त काम संभाला कि शायद कोल किसी दिन अपनी आदतें बदल लेंगे। शर्मा ने आरोप लगाया कि अभिभावकों ने भी शिक्षक के इस व्यवहार को लेकर कई बार उनका विरोध किया था।
शर्मा ने बताया कि जब भी अभिभावक उनसे पूछते कि वह नशे की हालत में स्कूल क्यों आते हैं, तो वह बहस करते हुए कहते, जब मैं आपसे कोई स्पष्टीकरण नहीं मांग रहा हूं, तो आप मुझसे मेरे कार्यों का हिसाब कैसे मांग सकते हैं? मुझे अभिभावकों से मिन्नतें करनी पड़ती थीं कि वे कृपया अपने बच्चों को स्कूल भेजना जारी रखें।