यूनेस्को की दहलीज पर MP के तीन टाइगर रिजर्व: पेंच, कान्हा और बांधवगढ़ को मिल सकती है वैश्विक पहचान
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने मध्य प्रदेश के पेंच, कान्हा और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व को बायोस्फीयर रिजर्व घोषित करने का प्रस्ताव यूनेस्को को भेजा है। यह ...और पढ़ें

अभयारण्य में बाघ (प्रतीकात्मक चित्र)

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संजय कुमार शर्मा, उमरिया। मध्य प्रदेश के तीन और टाइगर रिजर्व पेंच, कान्हा और बांधवगढ़ को जल्द ही बायोस्फीयर रिजर्व के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सकती है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने यूनाईटेड नेशन्स एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल आर्गेनाइजेशन (यूनेस्को) के मैन एंड बायोस्फीयर कार्यक्रम के तहत इन तीनों क्षेत्रों को बायोस्फीयर रिजर्व घोषित करने का प्रस्ताव तैयार किया है।
राज्य की नोडल संस्था एप्को (एनवायरमेंटल प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन ऑर्गेनाइजेशन) द्वारा तैयार प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए यूनेस्को भेजा गया है। पेंच, कान्हा और बांधवगढ़ को बायोस्फीयर रिजर्व घोषित किए जाने के पीछे सबसे बड़ी वजह इन क्षेत्रों की समृद्ध जैव विविधता है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ेगी पहचान
पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ समिता राजौरा का कहना है कि बायोस्फीयर रिजर्व का दर्जा मिलने से इन क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिलेगी। इसके साथ ही अनुसंधान, पर्यावरण शिक्षा, जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दर्जा मिलने से वन्यजीव पर्यटन को भी नई गति मिलेगी और स्थानीय समुदायों को रोजगार के अतिरिक्त अवसर प्राप्त होंगे।
इन्हें मिला बायोस्फीयर रिजर्व का दर्जा
वर्तमान में प्रदेश के तीन रिजर्व बायोस्फीयर रिजर्व हैं। इनमें पचमढ़ी 2009 में यूनेस्को की विश्व बायोस्फीयर रिजर्व नेटवर्क में शामिल किया गया। इसमें सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, बोरी अभयारण्य और पचमढ़ी अभयारण्य शामिल हैं। अचानकमार-अमरकंटक रिजर्व मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में फैला है। मप्र के अमरकंटक को यूनेस्को ने 2012 में विश्व बायोस्फीयर रिजर्व नेटवर्क में शामिल किया था। जबकि पन्ना रिजर्व 2020 में यूनेस्को की विश्व नेटवर्क आफ बायोस्फीयर रिजर्व में शामिल किया गया था।
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वन विशेषज्ञों के अनुसार यूनेस्को केवल वन्यजीवों की संख्या को आधार नहीं बनाता, बल्कि जैव विविधता, पारिस्थितिक संतुलन, स्थानीय समुदायों की भागीदारी, अनुसंधान की संभावनाएं और सतत विकास के माडल जैसे कई पहलुओं का मूल्यांकन करता है।
ये है विशेषता
- कान्हा टाइगर रिजर्व मध्य भारत के सबसे समृद्ध वन पारिस्थितिकी तंत्रों में गिना जाता है। यहां दुर्लभ हार्डग्राउंड बारहसिंगा का सफल संरक्षण विश्व स्तर पर सराहा गया है। विशाल वन क्षेत्र, समृद्ध जैव विविधता और वैज्ञानिक संरक्षण प्रबंधन इसकी विशेषता है।
- बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व उच्च बाघ घनत्व क्षमता और बेहतर वन्यजीव आवास के लिए प्रसिद्ध है। यहां बाघों के अलावा तेंदुआ, भालू, सांभर, चीतल और अनेक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं।
- पेंच टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित एक महत्वपूर्ण वन्यजीव कारिडोर है। यह क्षेत्र कई वन्य प्रजातियों के आवागमन और संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।