29 साल तक भारत में छिपकर रहा बांग्लादेशी घुसपैठिया, बदलता रहा ठिकाने; सीहोर कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा
मध्य प्रदेश के सीहोर में एक बांग्लादेशी नागरिक को 29 साल तक अवैध रूप से भारत में रहने के आरोप में सात साल के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने क ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र
HighLights
बांग्लादेशी नागरिक को सीहोर कोर्ट ने 7 साल की सजा दी।
29 साल पहले बिना वीजा-पासपोर्ट भारत में घुसा था।
फर्जी आधार-पैन कार्ड बनवाकर पहचान छिपा रहा था।
डिजिटल डेस्क, सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर में अवैध रूप से रह रहे एक बांग्लादेशी नागरिक को जिला सत्र न्यायालय ने सात वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी करीब 29 साल पहले बिना पासपोर्ट और वीजा के भारत में घुसा था और वर्षों तक अपनी पहचान छिपाकर राजस्थान व मध्य प्रदेश में रहता रहा।
अपर लोक अभियोजक रेखा चौरसिया के अनुसार, 27 अप्रैल 2025 को सीहोर कोतवाली पुलिस ने शहर के इंदिरा नगर टप्पर क्षेत्र से 44 वर्षीय इरशाद को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान वह भारत में वैध प्रवेश या निवास से जुड़े कोई दस्तावेज, पासपोर्ट या वीजा प्रस्तुत नहीं कर सका।
15 साल की उम्र में बांग्लादेश से आया
जांच में सामने आया कि इरशाद महज 15 वर्ष की उम्र में बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत आया था। पहले वह राजस्थान के अजमेर में करीब 15-16 साल तक रहा। इसके बाद मध्य प्रदेश के सीहोर पहुंचा, जहां पहले लुनिया मोहल्ले में पांच वर्ष और फिर पिछले छह वर्षों से इंदिरा नगर टप्पर इलाके में रह रहा था।
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने उसे भारत में अवैध प्रवेश और बिना वैध अनुमति के लंबे समय तक निवास करने का दोषी मानते हुए सात साल के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
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तलाशी में मिला बांग्लादेश का जन्म प्रमाणपत्र
पुलिस जांच के दौरान आरोपी के पास से बांग्लादेश का जन्म प्रमाणपत्र और उसके माता-पिता के पहचान संबंधी दस्तावेजों की प्रतियां बरामद हुईं, जो बांग्ला भाषा में थीं। जांच में उसकी पहचान बांग्लादेश के निलफामारी जिले के निवासी के रूप में हुई, जो भारत-बांग्लादेश सीमा के निकट स्थित है।
भारतीय दस्तावेज बनवाकर छिपाई पहचान
जांच में यह भी सामने आया कि इरशाद ने खुद को भारतीय नागरिक साबित करने के लिए सीहोर के पते पर आधार कार्ड, पैन कार्ड और समग्र आईडी बनवा ली थी। इन्हीं दस्तावेजों के सहारे वह वर्षों तक भारतीय नागरिक बनकर रह रहा था।