ग्वालियर के बेला गांव डबल मर्डर केस में सात साल बाद फैसला, दोनों दोषियों को आजीवन कारावास; दो सगे भाइयों के सिर में मारी थी गोली
ग्वालियर के बेला गांव के बहुचर्चित डबल मर्डर केस में सात साल बाद न्यायालय ने रामसेवक कुशवाह और राघवेन्द्र रावत को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र
HighLights
बेला गांव डबल मर्डर केस में सात साल बाद फैसला।
रामसेवक और राघवेन्द्र को आजीवन कारावास की सजा।
दो भाइयों की गोली मारकर हत्या का मामला।
डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। शहर के बहुचर्चित बेला गांव डबल मर्डर केस में करीब सात वर्ष बाद न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपितों को दोषी करार दिया है। चतुर्थ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेश सिंह जमरा की अदालत ने रामसेवक कुशवाह और राघवेन्द्र उर्फ कालू रावत को दोहरे हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोनों पर अर्थदंड भी लगाया गया, जबकि एक आरोपी को अवैध हथियार रखने के मामले में अतिरिक्त सजा भी मिली है।
पानी के टैंकर के पास मिले थे दोनों भाइयों के शव
अभियोजन के अनुसार 16 मार्च 2019 को गिरवाई थाना क्षेत्र के बेला गांव के कच्चे रास्ते के समीप पानी के टैंकर के पास धीरेन्द्र कुशवाह और उसके छोटे भाई दीपू कुशवाह के शव बरामद हुए थे। दोनों के सिर में गोली मारी गई थी। घटना के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की थी।
वैज्ञानिक साक्ष्यों ने मजबूत किया अभियोजन का पक्ष
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट, बरामद हथियार, मोबाइल रिकॉर्ड समेत अन्य परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपितों को दोषी माना।
कोर्ट ने माना, गोली मारकर की गई थी हत्या
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि दोनों युवकों की मौत गोली लगने से हुई थी और यह सुनियोजित हत्या का मामला है। न्यायालय ने रामसेवक कुशवाह को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोनों हत्याओं के लिए अलग-अलग आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।
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वहीं राघवेन्द्र उर्फ कालू रावत को भी दोनों हत्याओं में आजीवन कारावास से दंडित किया गया। इसके अलावा अवैध हथियार रखने के अपराध में आयुध अधिनियम के तहत दो वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक कुलदीप दुबे ने प्रभावी पैरवी की।