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    महाकुंभ वायरल गर्ल से शादी करने वाले फिल्म निर्माता मोहम्मद फरमान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

    Updated: Wed, 01 Jul 2026 11:45 PM (IST)

    फिल्म निर्माता मोहम्मद फरमान खान की अग्रिम जमानत याचिका मंडलेश्वर कोर्ट ने खारिज कर दी है। उन पर प्रयागराज महाकुंभ की वायरल गर्ल मोनालिसा को झांसा देक ...और पढ़ें

    मोनालिसा व फरमान (फाइल फोटो)

    मोनालिसा व फरमान (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. फिल्म निर्माता फरमान खान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज।

    2. आरोपित पर पॉक्सो व एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज है केस।

    3. फिल्म में काम का झांसा देने व नाबालिग से शादी का आरोप।

    डिजिटल डेस्क, इंदौर। प्रयागराज महाकुंभ में माला बेचते हुए इंटरनेट मीडिया में वायरल हुई बिल्लौरी आंखों वाली लड़की मोनालिसा से शादी करने वाले फिल्म निर्माता मोहम्मद फरमान खान की अग्रिम जमानत याचिका विशेष न्यायाधीश (लैंगिक अपराधों से बाल संरक्षण अधिनियम), मंडलेश्वर ने खारिज कर दी है।

    पॉक्सो व एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज केस

    बता दें कि मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के महेश्वर थाना क्षेत्र निवासी मोनालिसा को नाबालिग बताते हुए मोहम्मद फरहान के खिलाफ पॉक्सो व एससी-एसटी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में आरोपित को अग्रिम जमानत का लाभ देना उचित नहीं है।

    फिल्म में काम दिलाने का झांसा देने का आरोप

    अभियोजन के अनुसार, 25 मार्च 2026 को पीड़िता के पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी नाबालिग बेटी को फिल्मों में काम दिलाने का झांसा देकर आरोपित अपने साथ केरल ले गया। वहां उसने झांसा देकर शादी कर ली। पीड़िता के इंटरनेट मीडिया से दोनों के संपर्क में होने की उन्हें जानकारी मिली।

    वायरल गर्ल की जन्मतिथि को लेकर विवाद

    अभियोजन ने न्यायालय को बताया कि पीड़िता के माता-पिता ने उसके जन्म संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनके अनुसार उसकी जन्मतिथि 30 दिसंबर 2009 है। आरोपित की ओर से प्रस्तुत जन्म प्रमाण-पत्र बाद में तैयार कराया गया है, जिससे उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे। पुलिस ने यह भी तर्क दिया कि आरोपित ने जांच में सहयोग नहीं किया और उसके फरार रहने व साक्ष्यों को प्रभावित करने की आशंका है।

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    बचाव पक्ष का यह तर्क

    आरोपित की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका में दावा किया गया कि पीड़िता अपनी इच्छा से उसके साथ गई थी और उसने स्वयं को बालिग बताया था। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि दोनों ने आपसी सहमति से विवाह किया और विवाह का पंजीयन भी कराया गया। यह भी तर्क दिया गया कि पीड़िता के पिता की शिकायत के बाद दोनों के खिलाफ झूठा प्रकरण दर्ज कराया गया है।