इंदौर: मुस्लिम महिला ने मतांतरण कर रचाई शादी, 24 घंटे सुरक्षा देने से हाई कोर्ट का इंकार, कहा- आशंकाओं पर नहीं दे सकते आदेश
इंदौर हाई कोर्ट ने एक अंतरधार्मिक दंपती को 24 घंटे पुलिस सुरक्षा देने से इनकार कर दिया है, यह कहते हुए कि केवल आशंकाओं या संदिग्ध गतिविधियों के आधार प ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, इंदौर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने एक अंतरधार्मिक दंपती को 24 घंटे पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग ठुकरा दी है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल सामान्य आशंकाओं, संदिग्ध गतिविधियों या इक्का-दुक्का घटनाओं के आधार पर लगातार निजी सुरक्षा उपलब्ध कराने के आदेश जारी नहीं किए जा सकते।
हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी रतलाम निवासी एक दंपती द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज करते हुए की। याचिका में दंपती ने दावा किया था कि कुछ संदिग्ध लोग उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने कार रोकने की कोशिश, घर के आसपास संदिग्ध वाहन घूमने और अन्य घटनाओं का हवाला देते हुए चौबीसों घंटे पुलिस सुरक्षा और विशेष रूप से रात के समय अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की थी।
“सुरक्षा मांगने वाली याचिकाओं के लिए ठोस सबूत जरूरी”
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने कहा कि इस तरह की असाधारण सुरक्षा मांगने वाली याचिकाओं को स्पष्ट और ठोस खतरे के सबूतों से समर्थित होना चाहिए। केवल आशंकाओं या संदिग्ध वाहनों की घटनाओं के आधार पर निजी हथियारबंद सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सामान्य तौर पर नियमित पुलिस गश्त और जांच पर्याप्त होती है। अदालत सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका निभाते हुए हर मामले में विशेष सुरक्षा दस्ते तैनात करने के आदेश नहीं दे सकती।
महिला ने बदला था धर्म, 2019 में हुई थी शादी
याचिका के अनुसार, महिला पहले इस्लाम धर्म मानती थी, लेकिन उसने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म अपनाया और वर्ष 2019 में दिल्ली स्थित एक आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह किया।
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दंपती का कहना था कि विवाह और धर्म परिवर्तन की जानकारी परिवार को मिलने के बाद उन्हें लगातार धमकियां मिलने लगीं। इसी आधार पर उन्होंने वर्ष 2022 में भी हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। तब अदालत ने रतलाम पुलिस अधीक्षक को कानून के तहत उनकी सुरक्षा संबंधी आवेदन पर विचार करने के निर्देश दिए थे।
“हथियारबंद गार्ड हटाकर होमगार्ड जवान लगाया”
मौजूदा याचिका में दंपती ने आरोप लगाया कि 13 अप्रैल को उनकी सुरक्षा में तैनात हथियारबंद गार्ड को बिना किसी स्पष्ट कारण हटा दिया गया। उसकी जगह एक होमगार्ड जवान को तैनात किया गया, जिसके पास न हथियार था और न ही संचार के लिए मोबाइल फोन।
हालांकि, राज्य सरकार ने कोर्ट में दंपती की मांगों का विरोध करते हुए कहा कि याचिका में लगाए गए आरोप पर्याप्त प्रमाणों से समर्थित नहीं हैं।
“हर अंतरधार्मिक विवाह में सुरक्षा की मांग बढ़ रही”
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने चिंता जताई कि हाल के समय में अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाह करने वाले कई जोड़े लगातार पुलिस सुरक्षा की मांग को लेकर अदालत पहुंच रहे हैं, जबकि अधिकांश मामलों में किसी आसन्न खतरे का स्पष्ट और अकाट्य प्रमाण नहीं होता।
कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार सर्वोपरि है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था का सूक्ष्म प्रबंधन अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। अदालत केवल यह सुनिश्चित कर सकती है कि पुलिस प्रशासन कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करे।
पुलिस को दिए कार्रवाई के निर्देश
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि स्थानीय पुलिस प्रशासन का दायित्व है कि ऐसी शिकायतें मिलने पर वह सक्रिय, त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई करे। अदालत ने कहा कि पुलिस को सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए निवारक और सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए।
इसी आधार पर कोर्ट ने दंपती की याचिका खारिज करते हुए कहा कि मांगी गई विशिष्ट राहतें रिट क्षेत्राधिकार के तहत प्रदान नहीं की जा सकतीं।