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    चंद पलों की 'माइक्रो स्लीप' बन सकती है जानलेवा, जानिए कैसे चूक जाता है ड्राइवर और बढ़ जाता है हादसे का खतरा

    Updated: Thu, 02 Jul 2026 08:31 PM (IST)

    राजस्थान के दौसा बस हादसे के बाद माइक्रो स्लीप पर चर्चा तेज हो गई है, जो कुछ सेकंड की नींद में भी बड़े सड़क हादसों का कारण बन सकती है। यह स्थिति चालक ...और पढ़ें

    माइक्रो स्लीप से बढ़ता हादसे का खतरा (प्रतीकात्मक चित्र)

    माइक्रो स्लीप से बढ़ता हादसे का खतरा (प्रतीकात्मक चित्र)

    HighLights

    1. माइक्रो स्लीप कुछ सेकंड की नींद है, जो जानलेवा हादसे कराती है।

    2. बिना एहसास हुए चालक वाहन पर नियंत्रण खो देता है, बढ़ता खतरा।

    3. रात में नींद का जैविक दबाव अधिक होने से माइक्रो स्लीप बढ़ती है।

    डिजिटल डेस्क, इंदौर। राजस्थान के दौसा में हुए भीषण बस हादसे के बाद फिर यह सवाल चर्चा में है कि क्या कुछ सेकंड की माइक्रो स्लीप भी बड़े सड़क हादसे की वजह बन सकती है? माइक्रो स्लीप ऐसी स्थिति है, जब नींद की कमी या अत्यधिक थकान के कारण मस्तिष्क के वे हिस्से, जो सतर्कता और प्रतिक्रिया नियंत्रित करते हैं, कुछ क्षणों के लिए नींद जैसी अवस्था में चले जाते हैं। यही कुछ सेकंड हाईवे पर जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन सकते हैं।

    माइक्रो स्लीप से यूं बढ़ता है खतरा

    विशेषज्ञों के अनुसार, माइक्रो स्लीप आमतौर पर एक से 10 सेकंड तक रहती है। कई बार चालक को इसका एहसास भी नहीं होता। यदि कार या बस 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हो, तो तीन सेकंड में वह लगभग 67 मीटर और पांच सेकंड में करीब 111 मीटर तक चालक के नियंत्रण के बिना आगे बढ़ सकती है। ऐसे में सामने वाहन, डिवाइडर, मोड़ या पैदल यात्री होने पर दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

    रिपोर्ट दे रही गवाही

    इस खतरे की झलक सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की 'रोड एक्सीडेंट्स इन इंडिया-2024' रिपोर्ट में भी दिखाई देती है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में रात 12 से तीन बजे के बीच 25,001 और रात तीन से सुबह छह बजे के बीच 23,398 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं, यानी केवल आधी रात से सुबह छह बजे के बीच ही देश में करीब 48,400 सड़क हादसे हुए। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, यही वह समय होता है, जब शरीर पर नींद का जैविक दबाव सबसे अधिक रहता है और माइक्रो स्लीप की आशंका बढ़ जाती है।

    माइक्रो स्लीप से पहले शरीर देता है ये संकेत

    -बार-बार जम्हाई आना। 
    -आंखों में भारीपन या जलन महसूस होना। 
    -बार-बार पलकें झपकना।
    -ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई। 
    -पिछली कुछ किलोमीटर की ड्राइव याद न रहना। 
    -वाहन का लेन से भटकना। 
    -अचानक झटका महसूस होना। 

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    तीन से पांच सेकंड में कितनी दूरी तय करता है वाहन?

    रफ्तार ---- 3 सेकंड में दूरी ---- 5 सेकंड में दूरी
    60 किमी/घंटा ----  लगभग 50 मीटर ----  लगभग 83 मीटर
    80 किमी/घंटा ----  लगभग 67 मीटर ----  लगभग 111 मीटर
    100 किमी/घंटा ----  लगभग 83 मीटर ----  लगभग 139 मीटर

    नींद का झोंका और माइक्रो स्लीप में अंतर

    ड्राइविंग के दौरान नींद का झोंका आने पर चालक को आमतौर पर अपनी थकान और नींद का एहसास होता है। लेकिन माइक्रो स्लीप में मस्तिष्क बिना चेतावनी के कुछ सेकंड के लिए नींद की अवस्था में चला जाता है। उस दौरान वाहन पर नियंत्रण और प्रतिक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है, जबकि कई मामलों में चालक को इसका एहसास भी नहीं होता।

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    नींद की कमी होने पर मस्तिष्क बिना किसी चेतावनी के कुछ सेकंड के लिए सक्रिय प्रतिक्रिया देना बंद कर सकता है। इसे ही माइक्रो स्लीप कहते हैं। उस दौरान चालक को लगता है कि वह जाग रहा है, जबकि उसकी प्रतिक्रिया लगभग समाप्त हो चुकी होती है। सड़क पर यही कुछ सेकंड जानलेवा साबित हो सकते हैं।
    - डॉ. कुणाल बहरानी, न्यूरोलॉजिस्ट