उज्जैन की वैदिक घड़ी का वैश्विक संस्करण जारी, दुनिया को बताएगी तिथि, मुहूर्त और नक्षत्र; लखनऊ के लेटे हनुमान मंदिर से पहला ऑर्डर
उज्जैन की विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की तकनीक अब 'आरोहणम् वैदिक घड़ी' के रूप में वैश्विक स्तर पर व्यावसायिक तौर पर उपलब्ध होगी। यह डिजिटल इंस्टालेशन भारत ...और पढ़ें

लेटे हनुमान मंदिर से मिला वैदिक घड़ी का ऑर्डर।
HighLights
आरोहणम् वैदिक घड़ी का पहला व्यावसायिक संस्करण जारी।
भारतीय वैदिक कालगणना के अनुसार तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त बताएगी।
लखनऊ के लेटे हनुमान मंदिर से मिला पहला ऑर्डर।
धीरज गोमे, उज्जैन। भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में विकसित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की तकनीक अब वैश्विक स्तर पर नए स्वरूप में पहुंचने जा रही है। 'आरोहणम् वैदिक घड़ी' का पहला व्यावसायिक संस्करण जारी किया गया है। इसे विश्व की पहली वैदिक टाइम हेरिटेज इंस्टालेशन बताया जा रहा है। इसे भारत के साथ-साथ विदेश के एयरपोर्ट, होटल, संग्रहालय, मंदिर, कार्पोरेट मुख्यालय और सांस्कृतिक संस्थानों में स्थापित करने की तैयारी है। यह उज्जैन में विकसित वैदिक कालगणना तकनीक को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने की दिशा में पहला व्यावसायिक कदम माना जा रहा है। इस घड़ी का पहला ऑर्डर लखनऊ स्थित लेटे हनुमान मंदिर से मिला है।
वैदिक कालगणना के मुताबिक बताएगी समय
यह डिजिटल इंस्टालेशन सामान्य घड़ी की तरह केवल घंटे और मिनट नहीं बताती। इसमें भारतीय वैदिक कालगणना के अनुसार तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, मुहूर्त, पर्व-त्योहार और पंचांग रियल टाइम में प्रदर्शित होते हैं। करीब छह फीट ऊंची यह इंस्टालेशन जिस शहर या देश में लगाई जाएगी, वहां के अक्षांश-देशांतर और खगोलीय गणनाओं के आधार पर स्थानीय सूर्योदय के अनुसार स्वतः वैदिक समय प्रदर्शित करेगी। यानी हर स्थान पर वहां के वास्तविक वैदिक समय की जानकारी मिलेगी।
पीएम मोदी ने किया था लोकार्पण
बता दें कि इस तकनीक की शुरुआत 29 फरवरी 2024 को हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उज्जैन में विश्व की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का लोकार्पण किया था। इसके बाद इसी तकनीक पर आधारित मोबाइल एप विकसित किया गया, जिसमें 3179 विक्रम पूर्व से सात हजार वर्षों से अधिक की भारतीय कालगणना, 30 प्रकार के शुभ-अशुभ मुहूर्त, पंचांग, व्रत-त्योहार, सूर्योदय-सूर्यास्त, मौसम और अन्य जानकारियां उपलब्ध कराई गईं। यह एप 189 से अधिक भाषाओं में संचालित हो सकता है। अब यही तकनीक स्थायी डिजिटल इंस्टालेशन के रूप में दुनिया के प्रतिष्ठानों तक पहुंचाई जा रही है।
108 विशेष संस्करण
इस परियोजना को विकसित करने वाले आरोह श्रीवास्तव वही विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने उज्जैन की मूल विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की डिजाइन तैयार किया था। उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में केवल 108 फाउंडर एडिशन तैयार किए जाएंगे। प्रत्येक इंस्टालेशन के साथ यूनिक सीरियल नंबर, फाउंडर के हस्ताक्षर और सर्टिफिकेट आफ ओरिजिनैलिटी दिया जाएगा। इसकी शुरुआती कीमत 2.49 लाख रुपये रखी गई है। पहला आर्डर लखनऊ के गोमती तट स्थित लेटे हनुमान मंदिर से मिल चुका है, जहां इसे जल्द स्थापित किया जाएगा।
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राष्ट्रीय पहचान के बाद अब वैश्विक विस्तार
उज्जैन की वैदिक घड़ी पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी है। अप्रैल 2026 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट कर चुके हैं। यह घड़ी वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में भी स्थापित है, जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसकी कार्यप्रणाली का अवलोकन कर चुके हैं। अब इसका व्यावसायिक संस्करण भारतीय कालगणना को दुनिया के प्रमुख संस्थानों तक पहुंचाने की दिशा में अगला कदम माना जा रहा है।
ये प्रमुख विशेषताएं
- स्थानीय सूर्योदय और खगोलीय गणनाओं के आधार पर स्वतः बदलता वैदिक समय।
- रियल टाइम में तिथि, नक्षत्र, योग, करण, मुहूर्त, वार और पंचांग की जानकारी।
- होटल, एयरपोर्ट, मंदिर, संग्रहालय, कार्पोरेट और सांस्कृतिक संस्थानों में स्थापना के लिए विकसित।
- भारतीय वैदिक कालगणना को आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने की पहल।
नंबर गेम
6 फीट वैदिक घड़ी की ऊंचाई
108 फाउंडर एडिशन
2.49 लाख रुपये शुरुआती कीमत