'पापा के साथ नहीं रहना, मुझे मम्मी के पास जाना है...' 7 वर्षीय बच्ची की मंशा पर हाई कोर्ट ने मां को सौंपी कस्टडी
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक सात वर्षीय बच्ची की इच्छा को प्राथमिकता देते हुए उसकी कस्टडी मां को सौंप दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभिभावकीय विवादों ...और पढ़ें

मप्र हाईकोर्ट (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक सात वर्षीय बच्ची की इच्छा को सर्वोच्च महत्व देते हुए उसकी कस्टडी मां को सौंपने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चे के हित और उसकी भावनाएं अभिभावकीय विवादों में सबसे महत्वपूर्ण हैं।
न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा और न्यायमूर्ति जेके पिल्लई की युगलपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। मामला जबलपुर निवासी प्रियंका द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके पति नरेंद्र 27 मई 2026 को बेटी निशि को दादी से मिलाने के बहाने नर्मदापुरम ले गए और बाद में उसे वापस नहीं लौटाया।
याचिका में कहा गया था कि जन्म से ही बच्ची मां की देखरेख में रह रही है और उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध अपने पास रखना कानूनसम्मत नहीं है।
कोर्ट ने बच्ची से सीधे जाना सच
सुनवाई के दौरान पिता नरेंद्र ने अदालत को बताया कि बच्ची अपनी दादी से मिलने की इच्छा जता रही थी, इसलिए वह उसे अपने साथ ले गए थे। मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए हाई कोर्ट ने बच्ची को व्यक्तिगत रूप से पेश करने के निर्देश दिए।
अदालत में जब बच्ची से बातचीत की गई तो उसने स्पष्ट शब्दों में कहा, "पापा मुझे दादी से मिलाने ले गए थे, लेकिन मैं उनके साथ नहीं रहना चाहती। मुझे अपनी मम्मी के पास जाना है।"
बच्ची की इस स्पष्ट और सहज अभिव्यक्ति को अदालत ने गंभीरता से लिया।
बच्ची की इच्छा को माना निर्णायक आधार
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि भले ही पिता का उद्देश्य गलत साबित नहीं हुआ हो, लेकिन बच्ची को उसकी मां से अलग रखकर अपने पास रखना विधिसम्मत नहीं माना जा सकता। विशेष रूप से तब, जब बच्ची स्वयं अपनी मां के साथ रहने की इच्छा जता रही हो। अदालत ने तत्काल प्रभाव से बच्ची की कस्टडी उसकी मां प्रियंका को सौंपने के निर्देश दिए।
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पिता-बेटी के संवाद पर भी दिए निर्देश
हाई कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया कि बच्ची अपने पिता से संपर्क बनाए रख सके। अदालत ने निर्देश दिया कि जब भी पिता अपनी बेटी से बातचीत करना चाहें, मां को फोन या अन्य उपयुक्त माध्यमों से संवाद की सुविधा उपलब्ध करानी होगी।