जबलपुर: बरगी बांध का घटता जलस्तर खोल रहा 40 साल पुराना राज, पानी से बाहर आई डूबी मोटर बोट बनी आकर्षण का केंद्र
बरगी बांध का घटता जलस्तर 40 साल पुरानी एक मोटरबोट को सामने ले आया है, जो दशकों से पानी में डूबी हुई थी। यह ऐतिहासिक नाव बरगी परियोजना के शुरुआती दौर क ...और पढ़ें

जलस्तर घटने के बाद सामने आई मोटरबोट।
HighLights
बरगी बांध में 40 साल पुरानी मोटरबोट मिली।
घटते जलस्तर के कारण पानी से बाहर आई नाव।
यह नाव बरगी परियोजना के शुरुआती दौर की है।
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। शहर के नजदीक स्थित बरगी बांध का घटता जलस्तर इस बार सिर्फ जल संकट की तस्वीर नहीं दिखा रहा, बल्कि चार दशक पुरानी एक भूली-बिसरी कहानी भी सामने ले आया है। बैकवाटर क्षेत्र में पानी कम होने के बाद लोहे की एक मोटर बोट दिखाई देने लगी है, जो वर्षों से जलराशि के भीतर दबी हुई थी।
नाव के सामने आने की खबर फैलते ही इसे देखने के लिए लोगों का तांता लग गया है। कई लोग इसे अपने कैमरों में कैद कर रहे हैं, जबकि सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें तेजी से साझा की जा रही हैं।
शुरुआती दौर की है मोटरबोट
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह मोटर बोट बरगी परियोजना के शुरुआती दौर की है। उस समय बांध निर्माण और डूब प्रभावित गांवों के लोगों के आवागमन के लिए ऐसी नावों का उपयोग किया जाता था। बताया जाता है कि वर्ष 1986 के आसपास तकनीकी खराबी या दुर्घटना के कारण यह नाव बैकवाटर में डूब गई थी। उस घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है, लेकिन नाव को दोबारा बाहर नहीं निकाला जा सका और समय के साथ यह पानी के भीतर ही इतिहास बन गई।
चढ़ी जंग की परत
अब जब जलस्तर काफी नीचे पहुंचा है तो नाव का अधिकांश हिस्सा सतह पर दिखाई देने लगा है। लोहे से बनी इस मोटर बोट पर वर्षों तक पानी में रहने के कारण मोटी जंग की परत चढ़ चुकी है, लेकिन उसका ढांचा आज भी पहचान में आता है। नाव पर लिखा सुमा रेप्स प्रोजेक्ट जबलपुर भी अब स्पष्ट दिखाई दे रहा है, जिससे उसके बरगी परियोजना से जुड़े होने के संकेत मिलते हैं। इधर बरगी बांध में इस तरह का दृश्य पहले कभी देखने को नहीं मिला। यही वजह है कि यह पुरानी नाव लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।
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बरगी परियोजना की निशानी
पर्यटक इसे बरगी परियोजना के इतिहास की एक अनमोल निशानी मान रहे हैं, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि घटता जलस्तर भविष्य के लिए जल संरक्षण की गंभीर चुनौती की ओर भी संकेत देता है। चार दशक तक पानी में दबी रही यह मोटर बोट आज केवल एक जंग लगी संरचना नहीं, बल्कि बरगी परियोजना के शुरुआती दिनों और उस दौर के संघर्षों की मूक गवाह बनकर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है।