दुष्कर्म की शिकायत पर FIR नहीं होने पर हाई कोर्ट सख्त, भोपाल पुलिस कमिश्नर को तीन दिन में कार्रवाई के निर्देश
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म और जबरन गर्भपात के मामले में एफआईआर दर्ज न होने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने भोपाल पुलिस कमिश् ...और पढ़ें

मप्र हाईकोर्ट भवन (फाइल फोटो)
HighLights
हाई कोर्ट ने दुष्कर्म शिकायत पर एफआईआर न होने पर नाराजगी जताई।
भोपाल पुलिस कमिश्नर को तीन दिन में कार्रवाई के निर्देश दिए।
पीड़िता ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म और गर्भपात का आरोप लगाया।
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, जबरन गर्भपात, मारपीट और धमकी देने के आरोपों पर एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिए हैं कि पीड़िता की शिकायत पर तीन दिन के भीतर कानून के अनुसार कार्रवाई करते हुए उचित निर्णय लें।
दुष्कर्म, जबरन गर्भपात का आरोप
याचिका के अनुसार पीड़िता ने 10 जुलाई 2026 को भोपाल के कमला नगर थाने में राजपाल अहिरवार के खिलाफ लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपित ने शादी का वादा कर उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में जबरन गर्भपात कराया। साथ ही उसके साथ मारपीट और धमकी देने का भी आरोप लगाया गया।
एफआईआर की बजाय धमकाया
पीड़िता का दावा है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बजाय उसे कथित तौर पर यह कहकर डराया गया कि यदि वह मामला दर्ज कराने पर अड़ी रही तो उसके खिलाफ 'हनी ट्रैप' का मामला दर्ज कर दिया जाएगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने आरोपी को बचाने का प्रयास किया और शिकायतकर्ता पर दबाव बनाया। पीड़िता ने भोपाल पुलिस कमिश्नर से भी शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
यह भी पढ़ें- फतवे से नहीं टूटेगा निकाह, कानूनी प्रक्रिया जरूरी; मुस्लिम तलाक पर MP हाईकोर्ट का अहम फैसला
तीन दिन में कार्रवाई के निर्देश
याचिका में तत्कालीन थाना प्रभारी रूपा पांडे, उपनिरीक्षक शैलेंद्र राजावत और महिला प्रधान आरक्षक डाली चौरसिया के खिलाफ विभागीय जांच और आपराधिक कार्रवाई की भी मांग की गई है। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि शिकायत का परीक्षण कर तीन दिन के भीतर विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और उसके अनुरूप निर्णय लिया जाए।