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    फतवे से नहीं टूटेगा निकाह, कानूनी प्रक्रिया जरूरी; मुस्लिम तलाक पर MP हाईकोर्ट का अहम फैसला

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 01:21 AM (IST)

    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल फतवे के आधार पर मुस्लिम निकाह समाप्त नहीं माना जा सकता, इसके लिए सक्षम न्यायालय की कानूनी प्रक्रिया आव ...और पढ़ें

    -प्रतीकात्मक चित्र

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    HighLights

    1. फतवे से निकाह समाप्त नहीं माना जा सकता।

    2. कानूनी तलाक के लिए सक्षम न्यायालय आवश्यक है।

    3. धार्मिक संस्थाएं विवाह विच्छेद घोषित नहीं कर सकतीं।

    डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मुस्लिम विवाह-विच्छेद (तलाक) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि केवल किसी धार्मिक संस्था के फतवे के आधार पर निकाह समाप्त नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि फतवा धार्मिक मार्गदर्शन हो सकता है, लेकिन विवाह को कानूनी रूप से समाप्त करने का अधिकार केवल सक्षम न्यायालय के पास है।

    यह मामला भोपाल की दारुल-दफा मसाजिद कमेटी द्वारा जारी एक फतवे से जुड़ा था। पति ने अदालत से आग्रह किया था कि उक्त फतवे के आधार पर उसके निकाह को समाप्त माना जाए। वहीं, पत्नी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि फतवा कानूनी तलाक का विकल्प नहीं हो सकता।

    मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने फतवे का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि फतवे में इस्लामी ग्रंथों के आधार पर पत्नी की कथित क्रूरता जैसी परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए धार्मिक राय दी गई है, लेकिन इसे कानूनी तलाक का दर्जा नहीं दिया जा सकता।

    धार्मिक संस्थाएं नहीं कर सकतीं कानूनी तलाक घोषित

    हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि कोई मदरसा, धार्मिक शिक्षण संस्था या मसाजिद कमेटी मुस्लिम दंपती का विवाह कानूनी रूप से समाप्त नहीं कर सकती। ऐसे मामलों में वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए सक्षम न्यायालय का आदेश आवश्यक है।

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    पति को नई याचिका दायर करने की छूट

    अदालत ने दीवानी प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के आदेश-7 नियम-11 के तहत वर्तमान वाद को खारिज कर दिया। हालांकि, पति को यह स्वतंत्रता दी गई कि वह यदि चाहे तो पारिवारिक न्यायालय में विधिसम्मत तलाक की नई याचिका दायर कर सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मुस्लिम विवाह-विच्छेद अधिनियम, 1939 भी ऐसी याचिका दायर करने में कोई बाधा नहीं बनता।